जीडीपी के अनुपात में शिक्षा सहित कुल बजट व्यय घटने पर जताई चिंता
मिशनसच न्यूज, जयपुर। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट को लेकर राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (रुक्टा डेमोक्रेटिक) के प्रदेश संयोजक प्रो. रमेश बैरवा ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा सहित कुल बजट व्यय में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी थी, लेकिन जीडीपी के अनुपात में बजट में वास्तविक कमी दिखाई दे रही है।
प्रो. बैरवा ने बताया कि वित्त मंत्री डॉ. निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल बजट व्यय ₹53,47,315 करोड़ प्रस्तुत किया है, जबकि अनुमानित जीडीपी ₹3,93,00,393 करोड़ है। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट व्यय ₹50,65,345 करोड़ था, जो अनुमानित जीडीपी ₹3,57,13,886 करोड़ का 14.18 प्रतिशत था। नई व्यवस्था में जीडीपी के अनुपात में कुल बजट व्यय घटकर लगभग 13 प्रतिशत के आसपास आ गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹1,28,650 करोड़ का प्रावधान था, जो जीडीपी का 0.36 प्रतिशत था। वित्तीय वर्ष 2026-27 में शिक्षा बजट को 8.27 प्रतिशत बढ़ाकर ₹1,39,289 करोड़ किया गया है, लेकिन जीडीपी के अनुपात में यह बढ़ने के बजाय घटकर 0.35 प्रतिशत रह गया है, जो अत्यंत निराशाजनक है। जबकि वर्ष 2026-27 में जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
प्रो. बैरवा ने कहा कि स्पष्ट है कि जीडीपी की दृष्टि से शिक्षा सहित कुल बजट में वास्तविक कटौती से समावेशी शिक्षा, समावेशी विकास और ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना बेहद कठिन होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जीडीपी के अनुपात में सकल बजट व्यय में की गई इस कटौती पर पुनर्विचार किया जाए।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


