पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निधन पर हलैना में श्रद्धांजलि सभा, किसान आंदोलन के मजबूत स्तंभ को खोया देश
मिशनसच न्यूज, हलैना।
देश के प्रख्यात किसान नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निधन से समूचे किसान आंदोलन और देशभक्त विचारधारा को गहरा आघात पहुँचा है। उनके असामयिक निधन पर हलैना कस्बे में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ किसान नेता एवं पूर्व जिला पार्षद इन्दल सिंह जाट सहित क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उन्हें शत-शत नमन किया।
ईआरसीपी आंदोलन को मिली थी ताकत
इन्दल सिंह जाट ने भावुक होते हुए कहा कि – “पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक 12 जनवरी 2025 को हलैना में आयोजित ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) आंदोलन की जनसभा में शामिल हुए थे। उन्होंने उस सभा में जल संकट को लेकर कहा था कि अगर ज़रूरत पड़ी तो पानी के लिए जेल जाना भी मंज़ूर है। उनके इस वक्तव्य ने किसानों और आंदोलन को नई ताकत दी थी।”
स्वर्गीय मलिक के आगमन के बाद ईआरसीपी संघर्ष को नई दिशा और गति मिली, जिसे आज भी किसान याद करते हैं।
सिद्धांतों के प्रति अडिग और स्पष्ट वक्ता थे मलिक
इन्दल सिंह जाट ने कहा कि सत्यपाल मलिक कभी भी सत्ता के लोभी नहीं रहे। वे डॉ. राममनोहर लोहिया और चौधरी चरण सिंह जैसे जननायकों की विचारधारा पर चलते थे।
वे सदैव किसानों, मजदूरों, नौजवानों और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में सबसे आगे रहे।
उन्होंने कहा – “मलिक साहब स्पष्टवादी नेता थे, जो सत्ता के खिलाफ भी सच बोलने से पीछे नहीं हटते थे। वे विचारों के लिए किसी भी कुर्बानी को तैयार रहते थे और सत्ता से टकराने का साहस रखते थे।”
हलैना में श्रद्धांजलि सभा, गांवों में भी शोक की लहर
पूर्व राज्यपाल के निधन की खबर के बाद हलैना सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें क्रांतिकारी किसान नेता बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय करार दिया।
इन्दल सिंह जाट ने कहा – “हम उन्हें सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि किसानों का प्रहरी और न्याय की आवाज़ मानते हैं। उनका जाना एक राष्ट्रीय क्षति है।”


