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    सरकारी अस्पताल बने डेंजर जोन, पसरा खौफ; प्रसूताएं अब अस्पताल जाने से भी डरने लगीं: जूली

    राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्था पर नेता प्रतिपक्ष का हमला, अस्पताल में प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कोटा, बीकानेर और जोधपुर में सामने आए प्रसूताओं से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के सरकारी अस्पताल अब आम लोगों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं रह गए हैं।

    जूली ने कहा कि कोटा में प्रसूताओं की मौत और टोंक में नवजात की मृत्यु जैसी घटनाओं के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। उनके अनुसार बीकानेर में महिलाओं की किडनी फेल होने और प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए, जबकि जोधपुर से भी इसी तरह की चिंताजनक खबरें मिल रही हैं।

    सरकारी अस्पतालों को बताया ‘डेंजर जोन’

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जिन अस्पतालों में लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जाते हैं, वहां अब भय का माहौल बन गया है। उनका कहना था कि प्रसूताएं और उनके परिजन सरकारी अस्पतालों में जाने से भी डरने लगे हैं। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    नकली दवाओं और लापरवाही पर उठाए सवाल

    जूली ने प्रदेश में कथित रूप से नकली और घटिया दवाओं की आपूर्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो उन्हें केवल लापरवाही मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की।

    पूर्व योजनाओं का किया उल्लेख

    उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्वास्थ्य क्षेत्र में कई जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित थीं, जिनका उद्देश्य आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और अस्पतालों में आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव देखने को मिल रहा है।

    अस्पतालों की मॉनिटरिंग पर भी जताई चिंता

    टीकाराम जूली ने कहा कि अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता, एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति और संक्रमण नियंत्रण जैसे मुद्दों पर प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली में गंभीर कमियां हैं, जिनका असर सीधे मरीजों पर पड़ रहा है।

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