सरिस्का के सरंक्षण के कारण बढ़ रहे है ऐसे दुर्लभ दृश्य
मिशनसच न्यूज, अलवर। सरिस्का टाइगर रिज़र्व में वन्यजीवन प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय दृश्य सामने आया। पांडुपोल हनुमान जी के दर्शन के लिए जाते समय मार्ग पर बाघिन ST-30 अपने शावकों के साथ दिखाई दी। यह दृश्य कुछ क्षणों के लिए रहा, लेकिन प्रकृति और वन्यजीवन के अद्भुत सामंजस्य का जीवंत प्रमाण बन गया।
वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने इस अनुभव को अत्यंत विशेष और रोमांचक बताते हुए कहा कि सरिस्का में बाघों की संख्या और उनका प्राकृतिक आवास में सुरक्षित विचरण इस बात का संकेत है कि संरक्षण के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक साथ बाघिन और उसके शावकों को देखना न केवल सौभाग्य की बात है, बल्कि यह सरिस्का टाइगर रिज़र्व की समृद्ध जैव विविधता और सफल संरक्षण नीति को भी दर्शाता है।
बताया गया कि पांडुपोल मार्ग से गुजर रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने जब बाघिन ST-30 को अपने शावकों के साथ सड़क के समीप देखा, तो कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जिससे बाघिन और उसके शावकों को किसी प्रकार का तनाव या बाधा न हो। कुछ देर बाद बाघिन अपने शावकों के साथ जंगल की ओर चली गई, जिसके बाद यातायात पुनः सुचारु किया गया।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघ संरक्षण के लिए जाना जाता है। बीते वर्षों में यहां बाघों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। बाघिन ST-30 और उसके शावकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सरिस्का में बाघों का प्रजनन सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में हो रहा है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरिस्का जैसे संरक्षित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, आधुनिक तकनीक का उपयोग, वनकर्मियों का प्रशिक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी अपील की कि वे जंगल क्षेत्र से गुजरते समय संयम और सावधानी बरतें, गति सीमा का पालन करें और वन्यजीवों की शांति भंग न करें।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने भी इस दुर्लभ दृश्य को अपने जीवन का यादगार पल बताया। कई लोगों ने कहा कि धार्मिक यात्रा के दौरान प्रकृति का ऐसा स्वरूप देखना मन को शांति और श्रद्धा से भर देता है। सरिस्का में बाघिन और उसके शावकों का सुरक्षित विचरण यह संदेश देता है कि यदि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे, तो वन्यजीवन संरक्षण के लक्ष्य अवश्य हासिल किए जा सकते हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सरिस्का टाइगर रिज़र्व न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक महत्वपूर्ण और सफल उदाहरण बनता जा रहा है।
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