सरिस्का टाइगर रिजर्व से मंगलवार को अलवरवासियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई
मिशन सच न्यूज़ अलवर।
सरिस्का टाइगर रिजर्व से मंगलवार को अलवरवासियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई। बफर जोन में बाघिन 2302 के साथ एक शावक कैमरा ट्रैप में नजर आया है। इस नई खोज के साथ सरिस्का में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 49 हो गई है, जो इस रिजर्व के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
सरिस्का का बाघ परिवार हुआ और बड़ा
वर्तमान में सरिस्का में बाघों की संख्या 49 तक पहुँच चुकी है, जिनमें 11 नर बाघ, 18 बाघिन और 20 शावक शामिल हैं। बफर जोन में बाघिन 2302 और उसके शावक का दिखाई देना वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सीसीएफ संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि बाघिन और शावक का विचरण क्षेत्र अलवर बफर रेंज में स्थित करणी माता मंदिर के आसपास है। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में टाइगर की संख्या 10 तक पहुँची है।
कटियार ने कहा – “बाघों की संख्या बढ़ना इस बात का सबूत है कि सरिस्का में वन्यजीव संरक्षण की नीतियाँ और सतत प्रयास सफल साबित हो रहे हैं। हमारे लिए यह गर्व का क्षण है कि सरिस्का अब बाघों के संरक्षण का मजबूत केंद्र बन रहा है।”
सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई गई
कैमरा ट्रैप में नए शावक के दिखाई देने के बाद वन विभाग ने उसके क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और सख्त कर दिया है।
वनकर्मियों को लगातार बाघिन और शावक की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे बाघिन और शावक के क्षेत्र में अनावश्यक भीड़भाड़, आवाजाही और शोर-शराबा न करें।
वन विभाग का मानना है कि शावकों की शुरुआती उम्र बेहद संवेदनशील होती है। इस दौरान उन्हें शांत और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता होती है। इसीलिए निगरानी बढ़ाई गई है ताकि किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप न हो।
वन मंत्री की प्रतिक्रिया
प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा ने बाघिन 2302 के साथ शावक दिखाई देने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह सरिस्का और अलवर के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा – “सरिस्का बाघों से निरंतर फल-फूल रहा है। संभव है कि बाघिन ने एक से अधिक शावकों को जन्म दिया हो। हालांकि फिलहाल एक ही शावक कैमरे में नजर आया है। यह सफलता संरक्षण कार्यों की बड़ी उपलब्धि है।”
वन मंत्री ने इसे राज्य सरकार और स्थानीय वन विभाग की मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि आने वाले समय में सरिस्का देश में बाघों के संरक्षण का आदर्श केंद्र बनकर उभरेगा।
सरिस्का का बढ़ता महत्व
सरिस्का टाइगर रिजर्व राजस्थान के सबसे प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। यहां के बाघों की गिनती कई उतार-चढ़ाव से गुजरी है।
साल 2005 में सरिस्का से बाघ पूरी तरह से विलुप्त हो गए थे। उसके बाद यहां पुनर्वास परियोजना के तहत रणथंभौर से बाघ लाकर छोड़े गए। धीरे-धीरे इन बाघों ने अपना कुनबा बढ़ाया और आज संख्या 49 तक पहुँच गई है।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उचित निगरानी और संरक्षण नीतियों से वन्यजीवों को सुरक्षित माहौल दिया जाए तो वे अपनी संख्या बढ़ाने में सक्षम होते हैं।
स्थानीय लोगों के लिए संदेश
वन विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि बाघों के विचरण क्षेत्र में जंगल सफारी या निजी यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें।
वन्यजीवों के लिए शांति और प्राकृतिक माहौल बनाए रखना सबसे जरूरी है। अगर लोग जिम्मेदारी दिखाएंगे तो बाघों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
बाघों की संख्या में वृद्धि से सरिस्का का महत्व केवल संरक्षण के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पर्यटन के नजरिए से भी और बढ़ गया है।
बढ़ते बाघों की संख्या से पर्यटक आकर्षित होंगे और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। होटल, गाइड और सफारी व्यवसाय से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन 2302 के साथ नए शावक का दिखाई देना न केवल वन विभाग बल्कि पूरे अलवर और राजस्थान के लिए गौरव का क्षण है।
यह इस बात का प्रतीक है कि यदि वन्यजीवों को संरक्षण और सुरक्षित वातावरण दिया जाए, तो वे स्वाभाविक रूप से अपनी संख्या बढ़ाते हैं। सरिस्का का यह बढ़ता कुनबा भविष्य में राजस्थान को बाघों के संरक्षण के क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


