झल्लारा और लसाड़िया में सबसे ज्यादा असर
बीमारी का सबसे ज्यादा असर झल्लारा और लसाड़िया क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। यहां बच्चों की तबीयत 24 घंटे के भीतर अचानक बिगड़ रही है। मंगलवार को दो अलग-अलग गांवों से 4.5 साल और 2 महीने के बच्चों को अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं बुधवार को 2 साल 2 महीने के एक और बच्चे की मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार बच्चों में पहले उल्टी-दस्त, फिर तेज बुखार और घबराहट के लक्षण दिखाई दिए। इसके बाद शरीर जकड़ने लगा और हालत तेजी से बिगड़ गई।
CMHO ने बताई गंभीर स्थिति
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार परमार ने बताया कि कई बच्चों को अस्पताल मृत अवस्था में ही लाया गया। झल्लारा के आमलोदा गांव निवासी 4.5 वर्षीय रौनक को भी परिजन मृत हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे। वहीं लसाड़िया क्षेत्र में 2 महीने के बच्चे को पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल लाने पर उसे भी बचाया नहीं जा सका।
जयपुर-उदयपुर से विशेषज्ञ टीम पहुंची
मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर और उदयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंच चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 500 से ज्यादा परिवारों का सर्वे किया जा चुका है। इस दौरान करीब 20 बच्चों में हल्के बुखार के लक्षण मिले हैं, जिन्हें दवा देकर निगरानी में रखा गया है।
1 से 6 अप्रैल के बीच 5 मौतें
जानकारी के अनुसार 1 से 6 अप्रैल के बीच 5 बच्चों की मौत हुई थी, जिनमें 2 सगे भाई भी शामिल थे। इन सभी बच्चों में बुखार, उल्टी और दस्त जैसे समान लक्षण पाए गए और 24 घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। ये बच्चे लसाड़िया क्षेत्र के लालपुरा और घाटा गांव के रहने वाले थे।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
लगातार हो रही मौतों के बाद जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग पूरी तरह सतर्क हैं। गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। फिलहाल बीमारी के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन जांच जारी है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।