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    Homeराजस्थानअलवरसांस्कृतिक रंगों में सजा विवाह समारोह, परंपरा और भावनाओं का संगम

    सांस्कृतिक रंगों में सजा विवाह समारोह, परंपरा और भावनाओं का संगम

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच हल्दी-मेहंदी व महिला संगीत ने बांधा समां

    अलवर। संस्कार, संवेदना और सामूहिक सौहार्द का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब श्री राम जानकी विवाह समिति के तत्वावधान में सार्वजनिक विवाह समारोह के अंतर्गत हल्दी, मेहंदी एवं महिला संगीत से सजे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन सेवा भारती समिति, अलवर द्वारा आदर्श विद्या मंदिर, मालवीय नगर में किया गया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के रूप में गणेश वंदना से हुआ। इसमें कल्याणी जी, निर्मला जी, पायल जी, अर्चना गुप्ता जी एवं रजनी मित्तल जी ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद सिलाई केंद्र की किशोरियों द्वारा “दुल्हन के हाथों में मेहंदी लगाओ” गीत की प्रस्तुति ने समारोह में उत्साह का संचार किया।

    पायल जी द्वारा प्रस्तुत “मेहंदी रचने लगी हाथों में” ने शृंगार रस को सजीव किया, वहीं “बन्नो तेरी हल्दी में आया है सारा परिवार” गीत पर सेवा भारती समूह और कन्या पक्ष के परिजनों ने पारिवारिक एकता और आत्मीयता का संदेश दिया।

    निर्मला शर्मा एवं निशा शर्मा ने “मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया” गीत के माध्यम से भाई-बहन के स्नेहिल रिश्ते को जीवंत किया। वहीं शिखा गुप्ता के समूह द्वारा “मैं तो छोड़ चली बाबुल का देश” की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

    नीरू सिलाई केंद्र की किशोरियों ने “कुड़माई के दिन आ गए” के माध्यम से विवाह की खुशियों को दर्शाया। सेवा भारती समूह द्वारा “लड़की तुम्हारी कुंवारी रह जाती” गीत में सामाजिक संदेश के साथ हल्का हास्य भी प्रस्तुत किया गया।

    रजनी मित्तल एवं अर्चना गुप्ता ने “मेरी बन्नो की आएगी बारात” से कार्यक्रम में ऊर्जा भरी, जबकि प्रकल्प शिक्षिका रमन ने “मेहंदी है रचने वाली” गीत से लोक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। “शुभ आंगन” की प्रस्तुति कुमकुम गुप्ता एवं उनकी टीम द्वारा आकर्षक रही।

    कमल आर्य ने अपनी काव्यात्मक प्रस्तुति “मिश्री सी मीठी बातें…” से कार्यक्रम को साहित्यिक स्पर्श दिया। अंत में रेनू मिश्रा और ममता त्यागी ने “सोन चिरैया, अब तुम उड़ने वाली हो” के माध्यम से कन्या के जीवन के नए चरण को भावुक अंदाज में प्रस्तुत कर कार्यक्रम का समापन किया।

    सम्पूर्ण आयोजन भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बना। सेवा भारती समिति, अलवर के इस प्रयास ने सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यों के प्रति जागरूकता और सहभागिता को नई दिशा दी।

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