महिलाओं ने रचाई मेहंदी और किया सोलह श्रृंगार, लहरिया-घेवर की खरीदारी से बाजारों में बढ़ी रौनक
लक्ष्मणगढ़। हरियाली तीज से एक दिन पहले मनाया जाने वाला लोकपर्व सिंजारा शुक्रवार को लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र में श्रावण शुक्ल द्वितीया के अवसर पर उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही कस्बे के बाजारों में महिलाओं की चहल-पहल रही। सौंदर्य प्रसाधन, चूड़ियों, लहरिया वस्त्रों और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ नजर आई।
सिंजारा विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला लोकपर्व है। इस दिन महिलाएं हाथों में मेहंदी रचाती हैं, नए लहरिया वस्त्र पहनकर पारंपरिक श्रृंगार करती हैं और लोकगीत गाते हुए झूलों का आनंद लेती हैं। हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा।
परंपरा के अनुसार सिंजारे पर विवाहित बेटी या बहन के लिए पीहर से श्रृंगार सामग्री, नए वस्त्र, मेहंदी, चूड़ियां, मिठाइयां, विशेषकर घेवर और फेणी, फल तथा अन्य उपहार भेजे जाते हैं। सिंजारा केवल श्रृंगार और खान-पान का पर्व नहीं, बल्कि पीहर और ससुराल के बीच प्रेम, अपनापन और रिश्तों की मिठास का प्रतीक भी माना जाता है।
मान्यता के अनुसार नवविवाहिता का पहला सिंजारा ससुराल पक्ष की ओर से आता है, जबकि बाद के वर्षों में पीहर से बेटी के ससुराल सिंजारा भेजने की परंपरा निभाई जाती है।
सिंजारे को लेकर महिलाओं में मेहंदी लगाने, लहरिया पहनने और पारंपरिक सोलह श्रृंगार करने को लेकर खासा उत्साह देखा गया। बाजार में महिलाओं की भीड़ सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों, चूड़ी बाजार, कपड़ा विक्रेताओं और हलवाइयों की दुकानों पर नजर आई।
तीज को देखते हुए हलवाइयों ने विभिन्न प्रकार के घेवर तैयार किए हैं। सिंजारे पर घेवर और फेणी की खरीदारी को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह रहा।
समय के साथ सिंजारा मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। पहले महिलाएं बाग-बगीचों में झूले झूलकर और पारंपरिक लोकगीत गाकर सिंजारा मनाती थीं। अब शहरी क्षेत्रों में होटल, क्लब और आयोजन स्थलों पर लहरिया उत्सव एवं किटी पार्टियों का आयोजन भी होने लगा है।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मेहंदी, हरे परिधान, घेवर, झूले और लोकगीत सिंजारे की परंपरा का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। कस्बे के बाजार में तीज की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देर शाम तक बनी रही।
सिंजारा हरियाली तीज के आगमन का प्रतीक माना जाता है। 15 अगस्त को सुहागिन महिलाएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी। महिलाएं अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी।
सिंजारा पर्व ने लक्ष्मणगढ़ के बाजारों में त्योहार की रौनक बढ़ा दी। महिलाओं के पारंपरिक परिधानों, हाथों में रची मेहंदी और बाजारों में सजी मिठाइयों ने कस्बे को तीज के रंग में रंग दिया।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


