क्षेत्र अध्ययन के बाद खनन परियोजना पर सवाल, पहाड़ों और जल सुरक्षा को बताया महत्वपूर्ण
अलवर। प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी एवं ‘भारत के जल पुरुष’ डॉ. राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जल बिरादरी की तीन सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने हाल ही में प्रस्तावित सिजीमाली बॉक्साइट खनन परियोजना के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए सिजीमाली पहाड़ी क्षेत्र का दौरा किया। अध्ययन के बाद आयोजित मीडिया सम्मेलन में टीम ने अपने निष्कर्ष सार्वजनिक किए और क्षेत्र की पर्यावरणीय एवं सामाजिक चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
टीम में आंध्र प्रदेश के पर्यावरणविद् बोलिसेट्टी सत्यनारायण, ओडिशा के जल कार्यकर्ता सुदर्शन दास तथा डॉ. राजेंद्र सिंह शामिल थे। दो दिवसीय क्षेत्र भ्रमण के दौरान टीम ने कई गांवों का दौरा कर आदिवासी समुदायों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद किया। टीम ने भवानीपटना जेल पहुंचकर हिरासत में बंद आदिवासी नेताओं से भी मुलाकात की तथा उनकी शिकायतों और चिंताओं को सुना।
जल बिरादरी ने स्पष्ट किया कि यह मीडिया सम्मेलन केवल एक औपचारिक प्रेस वार्ता नहीं था, बल्कि क्षेत्र भ्रमण, दस्तावेजों के अध्ययन और स्थानीय समुदायों से प्राप्त तथ्यों को सार्वजनिक करने का प्रयास था। टीम के अनुसार सिजीमाली क्षेत्र इंद्रावती और नागावली नदी प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र और जलविभाजक प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
जल, जंगल और आजीविका पर असर की आशंका
टीम ने कहा कि स्थानीय समुदायों ने प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना के कारण भूजल संसाधनों, वनों, जैव विविधता तथा आदिवासी समुदायों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में निगरानी के लिए ड्रोन के उपयोग, पुलिस कार्रवाई, कथित झूठे मुकदमों और पारंपरिक अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों को भी टीम के समक्ष रखा।
जल बिरादरी ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। टीम ने आदिवासी समुदायों की सहमति और संवैधानिक अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
गिरफ्तार आदिवासियों की रिहाई की मांग
टीम ने तिजमाली क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए आदिवासियों तथा सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज आजाद की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि क्षेत्र में दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। जल बिरादरी का कहना है कि स्थानीय लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर व्यापक जांच की आवश्यकता है।
पहाड़ों के संरक्षण के लिए विशेष कानून की मांग
जल बिरादरी ने 22-23 मई 2026 को जमशेदपुर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित ‘जमशेदपुर घोषणापत्र’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पहाड़ देश की जल सुरक्षा, नदी संरक्षण, जैव विविधता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। इसलिए पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों और नदियों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए जाने की आवश्यकता है।
टीम के अनुसार देशभर में बढ़ती खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहे हैं, जिससे नदियों, झरनों और जलधाराओं के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो रहा है। इसका सीधा असर कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।
जल बिरादरी ने कहा कि पहाड़ों, जल स्रोतों, जंगलों और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के हितों से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है।
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