अलवर के अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में रजत जयंती समारोह के तहत भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का 108 कलशों से भव्य महामस्तकाभिषेक किया गया।
मिशनसच न्यूज, अलवर ।
अलवर शहर के जयपुर रोड पर ढाई पैड़ी स्थित अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में रजत जयंती समारोह के दूसरे दिन रविवार को भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का भव्य महामस्तकाभिषेक 108 कलशों से किया गया। जैसे ही पूजन-विधि और मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक प्रारम्भ हुआ, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण ने पूरे इलाके को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम के दौरान अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर भक्तों से पूरा भरा हुआ था। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जैन पत्रकार महासंघ, अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि रजत जयंती समारोह के चलते मंदिर में लगातार धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान आदिनाथ के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अहिंसा स्थल आज अलवर का प्रमुख दिगम्बर जैन धर्मस्थल बन चुका है, जहां आने वाला हर व्यक्ति शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और ध्यान की अनुभूति करता है।
मंदिर के संस्थापक बच्चू सिंह जैन और अनिल जैन ने बताया कि अहिंसा स्थल में 25 वर्ष पहले 27 नवंबर 2000 से 1 दिसंबर 2000 तक पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया था, जो तत्कालीन दिगम्बर जैन संत उपाध्याय ज्ञानसागर जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ था। ज्ञानसागर जी आज भले ही समाधिस्थ हैं, लेकिन उस समय किए गए पंचकल्याणक को जैन समाज आज भी ऐतिहासिक और चमत्कारिक मानता है। उसी आयोजन से प्रेरित होकर अहिंसा स्थल दिनोंदिन विकसित होता गया और अब प्रदेशभर में पहचाना जाने लगा है।
अहिंसा स्थल का मुख्य आकर्षण गुफानुमा ध्यान केन्द्र है, जिसे विशेष रूप से इस प्रकार निर्मित किया गया है कि यहां बैठने वाला साधक पूर्ण शांति और एकाग्रता के साथ ध्यान कर सके। इसके अलावा मंदिर परिसर में जिनवाणी मंदिर भी स्थित है, जो अलवर का पहला जिनवाणी मंदिर है और धार्मिक ज्ञान व अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
समारोह में सुबह पूजा-अर्चना के बाद जब केसरिया धोती–दुपट्टा धारण किए श्रद्धालुओं ने 108 कलशों से भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का अभिषेक किया, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से अभिषेक में भाग लिया। कार्यक्रम में स्थानीय समाजजनों, जैन संगठनों, महिला मंडलों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही।
रजत जयंती समारोह के अंतर्गत आगे भी विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रस्तावित है।
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