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    ‘मन की बात‘ कार्यक्रम की 123वीं कड़ी, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने रचा नया इतिहास, देश के 95 करोड़ लोगों को मिल रहा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ

    जयपुर, 29 जून। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात‘ कार्यक्रम की 123वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर ‘मन की बात‘ कार्यक्रम को सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हाल ही में भारत के अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला के इंटरनेशनल स्पेस सेंटर पर पहुंचने की उपलब्धि की चर्चा की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने एक नया इतिहास रचा है। श्री मोदी ने श्री शुभांशु शुक्ला के साथ अपनी बातचीत का भी जिक्र किया। 

    श्री मोदी ने गत 21 जून को ‘एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य’ थीम पर आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर तीन लाख लोगों द्वारा एक साथ योग किया गया। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के बड़े शहरों में आयोजित शिविरों में योग के माध्यम से शांति, स्थिरता और संतुलन की झलक दिखाई दी। प्रधानमंत्री ने 3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा और उड़ीसा में आयोजित भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा के बारे में बात करते हुए कहा कि ये यात्राएं ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के भाव का प्रतिबिंब है। 

    प्रधानमंत्री ने भारत को हाल ही में मिली दो बड़ी उपलब्धियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को ट्रेकोमा मुक्त घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की 64 प्रतिशत से ज्यादा आबादी को किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश के लगभग 95 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े हुए हैं, जबकि वर्ष 2015 तक 25 करोड़ से कम लोगों तक सरकारी योजनाएं पहुंच पाती थी। 

    श्री मोदी ने वर्ष 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में संविधान की हत्या की गई और अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया था। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा उन लोगों को याद करना चाहिए, जिन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया। प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कला, शिल्प और कौशल की विविधता के बारे में बात करते हुए कहा कि मेघालय के विशेष एरी सिल्क के माध्यम से वहां की महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर इस धरोहर को आगे बढ़ा रही है। वहीं तेलंगाना के भद्राचलम की महिलाएं श्रीअन्न से बिस्किट तैयार कर हैदराबाद से लंदन तक भेज रही है। श्री मोदी ने कहा कि कर्नाटक के कलबुर्गी की महिलाओं द्वारा बनाई गई ज्वार की रोटी एक ब्रांड बन चुकी है। उन्होंने मध्यप्रदेश की सुमा उइके द्वारा मशरूम की खेती और पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की भी सराहना की। 

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