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    Homeराज्यबिहारबिरसा कृषि विश्वविद्यालय में 3 करोड़ की सहायता राशि हस्तांतरण

    बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में 3 करोड़ की सहायता राशि हस्तांतरण

    बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में शुक्रवार को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सहायता अनुदान राशि हस्तांतरण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस मौके पर राज्य भर के 28 एफपीओ के बीच करीब 3 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से हस्तांतरित की गई। कार्यक्रम में मौजूद एफपीओ प्रतिनिधियों और किसानों में इस पहल को लेकर उत्साह देखा गया।

    “किसानों के जीवन में बदलाव की कड़ी बनेगी यह राशि” – मंत्री

    मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि यह अनुदान राशि किसानों के जीवन में बदलाव लाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। लेकिन इसके लिए एफपीओ को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी होगी। उन्होंने कहा कि एफपीओ को एक लीडर की तरह राज्य के किसानों के लिए काम करना होगा। कृषि के क्षेत्र में सही दिशा दिखाना, नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करना और फसल चयन में सही मार्गदर्शन देना एफपीओ की अहम जिम्मेदारी है।

    आधुनिक खेती और आय दोगुनी करने पर जोर

    कृषि मंत्री ने कहा कि अगर किसानों को आधुनिक खेती से जुड़ना है और अपनी आय दोगुनी करनी है, तो उन्हें सरकार की योजनाओं से जुड़ना ही होगा। सरकार के सहयोग से ही प्रगतिशील और सफल किसानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कृषि निदेशक को निर्देश देते हुए कहा कि सहायता अनुदान राशि से जुड़ी वेबसाइट पर सभी योजनाओं की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसान ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का लाभ ले सकें। साथ ही किसानों से जुड़ी सफलता की कहानियों को भी वेबसाइट पर शामिल करने की जरूरत है।

    विमला देवी की सफलता का उदाहरण

    कार्यशाला के दौरान इटकी प्रखंड के ठाकुरगांव निवासी विमला देवी का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि आज दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुका है। एक छोटी सी शुरुआत से 80 हजार लीटर दुग्ध कलेक्शन तक पहुंचना काबिले तारीफ है। मंत्री ने कहा कि समाज में ऐसी कई और प्रेरणादायक कहानियां हैं, जिन्हें किसानों के बीच साझा किया जाना चाहिए। अनुभवों के आदान-प्रदान से किसानों को नई दिशा और नई प्रेरणा मिलती है।

    झारखंड में 50 प्रतिशत रोजगार कृषि से जुड़ा

    मंत्री ने कहा कि झारखंड में करीब 50 प्रतिशत रोजगार कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। यह आंकड़ा बताता है कि कृषि में रोजगार और व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। अगर किसान आधुनिक तरीके अपनाएं और सरकार की योजनाओं से जुड़ें, तो उनकी आय में निश्चित रूप से बढ़ोतरी हो सकती है।
    कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे, कृषि निदेशक भोर सिंह यादव, नाबार्ड के महाप्रबंधक आर.एस. भागवानी, एसएलबीसी के उपमहाप्रबंधक संतोष कुमार सिन्हा सहित कई अधिकारी और किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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