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    300 साल पुराना शिवलिंग हुआ चोरी, 12 साल बाद चोरों ने लौटाया! जानें इस रहस्यमयी शिवलिंग की कहानी

    मप्र के छतरपुर शहर के क्रिश्चियन अस्पताल के सामने भगवान शिव का एक ऐसा प्राचीन मंदिर है. जिसका इतिहास 300 साल पुराना बताया जाता है. 6वीं पीढ़ी के पुजारी लखन पुरी गोस्वामी बताते हैं कि लगभग 300 साल पहले औरंगजेब के शासन में हरिद्वार से हमारे पूर्वज गणेश मूर्ति लाए थे. इसके बाद औरंगजेब के सैनिकों से छिपाकर मूर्ति की स्थापना की गई थी. फिर मंदिर का निर्माण किया गया था. भगवान गणेश मंदिर निर्माण के दौरान ही शिवलिंग स्थापित किए गए थे. उस दौरान एक छोटी सी मढ़िया का निर्माण किया गया था.

    25 साल पहले शिवलिंग हुआ चोरी
    पुजारी लखन पुरी बताते हैं कि शिवलिंग शालिग्राम पत्थर से बना था जिससे चोरों के मन में शिवलिंग के प्रति लालच जागा और वह चोरी-छिपे शिवलिंग को चुरा ले गए. शिवलिंग के चोरी की घटना आज से 25 साल पहले की है.

    12 साल बाद चोर छोड गए शिवलिंग
    पुजारी लखन बताते हैं कि जब शिवलिंग चोरी हो गया तो दूसरे शिवलिंग की स्थापना की गई. सभी श्रद्धालु एक बार फिर से नए स्थापित शिवलिंग को पूजने लगे. लेकिन 12 साल बाद वही चोर शिवलिंग को नीम के पेड़ के नीचे छोड़ जाते हैं. पुराने शिवलिंग पर लोगों की नजर पड़ती है तो पूरे शहर में ये चर्चा फैल जाती है कि चोरों के साथ अनहोनी हुई इसलिए वह सकुशल शिवलिंग को छोड़ कर चले गए.

    शालिग्राम पत्थर से बने शिवलिंग
    पुजारी लखन बताते हैं कि मंदिर में नए शिवलिंग के साथ पुराने शिवलिंग को मंत्रोच्चारण के साथ स्थापित किया गया. पुजारी बताते हैं कि शालिग्राम पत्थर से बना शिवलिंग अपने आप में खास होता है. ये कभी भी पुराना नहीं होता है. 300 साल पहले शिवलिंग का जो कलर था आज भी वैसा ही कलर है. पुजारी बताते हैं कि पहले मंदिर एक छोटी सी मढ़िया के रूप में था. अब नये रूप में मंदिर बन गया है.
    किराए के मकान से मिलता छुटकारा
    पुजारी आगे बताते हैं कि‌ शिव मंदिर प्रांगण के आसपास जितने लोग किराए से रहते हैं वह सभी अपने खुद के बनाए मकान में जरूर जाते हैं. भले ही 5 साल बाद जाएं या 10 साल बाद. इस मोहल्ले में मंदिर को लेकर यही मान्यता है.

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