बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने 78 वर्षीय एक बुजुर्ग विधवा को उसके दिवंगत पति के लंबित सेवा लाभ और पेंशन का भुगतान न किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सरगुजा के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत को अवमानना नोटिस जारी किया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कलेक्टर से जवाब तलब किया है कि अदालत के आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब से पांच सप्ताह बाद तय की गई है।
क्या था हाईकोर्ट का पूर्व आदेश और मामला?
इस पूरे प्रकरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इससे पहले गत 6 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे याचिकाकर्ता बी. एक्का के दिवंगत पति से जुड़े सभी बकाया सेवा लाभों के दावों पर नियमानुसार विचार करें। इन लाभों में संशोधित वेतनमान, टाइम पे स्केल, क्रमोन्नति, बकाया राशि और पेंशन का पुनर्निर्धारण जैसी महत्वपूर्ण चीजें शामिल थीं। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि याची की वृद्धावस्था को देखते हुए प्रमाणित प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर इस पर त्वरित निर्णय लिया जाए।
दस्तावेज जमा करने के बाद भी नहीं मिला न्याय
अदालत के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार का दौर तो चला। सरगुजा संभाग आयुक्त ने गत 11 मई को कलेक्टर को आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र लिखा, जिसके पालन में अपर कलेक्टर ने 21 मई को पेंशन प्रक्रिया से जुड़े तमाम जरूरी दस्तावेज भी मांग लिए।
याचिकाकर्ता बुजुर्ग महिला ने अपनी ओर से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, मृत्यु प्रमाण पत्र और फोटोग्राफ सहित सभी मांगे गए दस्तावेज समय पर जमा करा दिए। इसके बावजूद उन्हें पेंशन का पुनर्निर्धारण, बकाया राशि और अन्य वैध सेवा लाभों का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें न्याय के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अवमानना याचिका पर अदालत की सख्ती
लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने पर 78 वर्षीय महिला ने अपने अधिवक्ताओं—नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा—के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और कलेक्टर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा है।


