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    गोल्ड लोन के नियम बदलने की तैयारी, कर्जदारों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    नई दिल्ली: यदि आप अपनी किसी भी आपातकालीन आवश्यकता या व्यावसायिक कार्य के लिए अपने स्वर्ण आभूषणों को गिरवी रखकर बैंक या वित्तीय संस्थानों से गोल्ड लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का गोल्ड लोन बाजार जल्द ही एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ने वाला है।

    बुलेट पेमेंट की व्यवस्था समाप्त कर ईएमआई मॉडल लाने की तैयारी

    अब तक देश में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से गोल्ड लोन लेने वाले लगभग 90 प्रतिशत ग्राहक एकमुश्त भुगतान यानी बुलेट पेमेंट के विकल्प को चुनते थे, जिसमें लोन अवधि के दौरान हर महीने किस्त देने की अनिवार्यता नहीं होती थी, लेकिन अब इस प्रणाली के बदलने से ग्राहकों को नए नियमों के अनुसार खुद को ढालना होगा।

    बढ़ते एनपीए और कर्ज के आंकड़ों को लेकर चिंता

    क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि बुलेट पेमेंट प्रणाली से नियमित ईएमआई मॉडल में तब्दील होने से निकट भविष्य में गोल्ड लोन से जुड़े एनपीए यानी फंसे हुए कर्ज में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 तक देश में स्वर्ण आभूषणों के बदले लिया गया कुल बकाया कर्ज बढ़कर 5.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

    बाजार के विस्तार और ग्राहकों पर पड़ने वाला सीधा असर

    आने वाले वित्त वर्षों के दौरान बैंकों और एनबीएफसी का कुल गोल्ड लोन 30 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़कर मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाएगा, जिसके तहत हर महीने नियमित किस्त चुकाने के नए नियमों से छोटे कर्जदारों और आम ग्राहकों को अपना मासिक बजट संतुलित करने में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

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