डूंगरपुर। धार्मिक स्थलों पर देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल-मालाओं के निस्तारण की समस्या से निपटने के लिए राजस्थान के डूंगरपुर शहर में एक बेहद सराहनीय और अभिनव कदम उठाया गया है। डूंगरपुर नगर परिषद की पहल पर शहर में अगरबत्ती निर्माण की एक विशेष यूनिट की शुरुआत की गई है, जिसमें मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों का सदुपयोग कर सुगंधित अगरबत्तियां बनाई जा रही हैं। इस योजना से जहां एक ओर फूलों के सही प्रबंधन का रास्ता साफ हुआ है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने से उनकी आजीविका मजबूत हो रही है। इस अनूठी पहल को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन संगम माना जा रहा है।
वैज्ञानिक तरीकों से फूलों को सुखाकर तैयार किया जा रहा सुगंधित पेस्ट
शास्त्री कॉलोनी स्थित सामुदायिक भवन में स्थापित इस नई अगरबत्ती निर्माण इकाई की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक है। शहरभर के विभिन्न मंदिरों से रोजाना निकलने वाले पवित्र पुष्पों को एकत्र करके पहले वैज्ञानिक पद्धति से सुखाया जाता है। इसके पश्चात, इन सूखे फूलों से उच्च गुणवत्ता वाला सुगंधित पेस्ट तैयार किया जाता है और आधुनिक मशीनों की सहायता से विभिन्न प्रकार की आकर्षक अगरबत्तियों का निर्माण किया जाता है, जिससे धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहता है और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचता है।
प्रतिदिन पचास हजार अगरबत्तियों के उत्पादन का बड़ा लक्ष्य
इस यूनिट की उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता काफी बेहतर है, जिसके तहत यहां प्रतिदिन लगभग 50 हजार अगरबत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इस अनोखी पहल का आधिकारिक उद्घाटन राज्य के स्वच्छता ब्रांड एंबेसेडर केके गुप्ता द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह यूनिट धार्मिक भावनाओं से जुड़े फूलों का सम्मानजनक पुनर्चक्रण (रिसाइकिल) करने के साथ-साथ शहर को पूरी तरह स्वच्छ रखने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार और आत्मनिर्भरता
यह परियोजना केवल कचरा प्रबंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया बन गई है। इस यूनिट के संचालन से जुड़ी महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सक्षम हो रही हैं। स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद के इस प्रयास की चौतरफा सराहना हो रही है, और आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।


