नई दिल्ली। देशभर के सरकारी गोदामों में रखे जाने वाले खाद्यान्न के रखरखाव और उसकी बर्बादी के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक विस्तृत लिखित जवाब पेश किया है। राजस्थान से सांसद हनुमान बेनीवाल और उत्तर प्रदेश के सांसद चंद्रशेखर द्वारा पूछे गए अतारांकित सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में जर्जर इमारतों या अपर्याप्त भंडारण व्यवस्था के कारण सेंट्रल पूल के गेहूं और चावल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों के दौरान खाद्यान्न में जो भी खराबी आई है, उसके मुख्य कारण चक्रवात, बाढ़ और भारी मानसूनी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं रही हैं।
पांच वर्षों में देश भर में 41 हजार मीट्रिक टन से अधिक अनाज हुआ क्षतिग्रस्त
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने संसद में पिछले पांच वर्षों का राज्यवार और वर्षवार ब्यौरा साझा करते हुए बताया कि एफसीआई द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक के लिए भारी मात्रा में खाद्यान्न भंडार सुरक्षित रखा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, देश भर के गोदामों में वर्ष 2021-22 के दौरान 3,456 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ, जिसकी कुल कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये थी। इसके बाद वर्ष 2022-23 में 2,922 मीट्रिक टन, वर्ष 2023-24 में उछाल के साथ 18,262 मीट्रिक टन, वर्ष 2024-25 में 14,055 मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 के दौरान 3,063 मीट्रिक टन अनाज क्षतिग्रस्त हुआ। इस प्रकार कुल पांच वर्षों में लगभग 36 करोड़ रुपये मूल्य का कुल 41,758 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ है।
प्राकृतिक आपदाओं को माना गया बर्बादी का कारण, लापरवाही पर अठारह कर्मचारियों पर कार्रवाई
सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि अनाजों के खराब होने के मामलों की गहन समीक्षा के बाद कुल 18 दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। एफसीआई के गोदामों में अनाज की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह से सतर्क है और भंडारण व्यवस्था को आधुनिक तथा सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, भंडारण क्षमता की कमी के कारण अनाज खराब होने की बात को खारिज करते हुए मंत्रालय ने दोहराया कि जो भी नुकसान हुआ है, वह मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं और अप्रत्याशित मौसमी बदलावों के चलते हुआ है।
राजस्थान में इस बार सबसे अधिक नुकसान, पंजाब पिछले पांच वर्षों में शीर्ष पर
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि इस बार सबसे ज्यादा खाद्यान्न का नुकसान राजस्थान राज्य में दर्ज किया गया है। वहीं, अगर पिछले पांच वर्षों के कुल आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पंजाब इस मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है, इसके अलावा हरियाणा और तमिलनाडु में भी अधिक नुकसान देखा गया है। इसके विपरीत, देश के पूर्वोत्तर राज्यों में सिक्किम और त्रिपुरा ऐसे राज्य रहे जहां पिछले पांच साल में एक किलो अनाज का भी नुकसान नहीं हुआ और वहां का खराबा शून्य दर्ज किया गया है।


