भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुलाकात देखने को मिली, जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल के एक आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों और उनकी प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने राज्य में आदिवासियों के अधिकारों, सुरक्षा और उनके कल्याण से जुड़े विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और निजीकरण रोकने की उठी मांग
मुख्यमंत्री के साथ हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखीं। सबसे पहले उन्होंने आगामी नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में राजकीय और सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की जोरदार मांग की। इसके साथ ही, आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संचालित होने वाले शासकीय आईटीआई संस्थानों, आवासीय छात्रावासों और स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने तथा इन सरकारी संस्थाओं की बुनियादी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत व सुचारू बनाने का आग्रह किया गया।
रीवा में कांग्रेस के आदिवासी जिला अध्यक्ष की हत्या के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए रीवा में आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की हुई सनसनीखेज हत्या के मामले को भी प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ बिना किसी देरी के बेहद कठोर और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को समय पर न्याय मिल सके और क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल कायम हो सके।
मुख्यमंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन, कांग्रेस ने आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई इस बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य से जुड़े इन तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को पूरी गंभीरता के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की तरफ से इन सभी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का पूरा भरोसा दिलाया गया है। साथ ही, कांग्रेस पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि वे आगे भी आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा के लिए पूरी ताकत से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।


