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    हल्दी की खेती से मिली सफलता, उन्नत तकनीक ने बदली किसान की तस्वीर

    हल्दी से किसान जसविंदर सिंह ने बढ़ाई आमदनी और रोजगार के अवसर

    अलवर। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर अलवर जिले के मालाखेड़ा क्षेत्र के एक किसान ने खेती-किसानी की तस्वीर बदल दी है। ग्राम कैरवाड़ा निवासी प्रगतिशील किसान जसविंदर सिंह ने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए हल्दी की खेती को अपनाया और उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधानों से जोड़ने का कार्य कर रही है। इसी दिशा में कृषि एवं उद्यान विभाग के मार्गदर्शन ने जसविंदर सिंह को नई राह दिखाई।

    हल्दी की खेती
    हल्दी की खेती

    जसविंदर सिंह बताते हैं कि पिता की बढ़ती उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने खेती को ही अपने व्यवसाय के रूप में चुना। खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव, कृषि विज्ञान केंद्र बारामती (महाराष्ट्र) और पूसा संस्थान, नई दिल्ली समेत कई संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने उद्यान विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों में भी भाग लिया।

    शुरुआत में उन्होंने सब्जियों की खेती की, लेकिन अधिक मुनाफे की संभावना को देखते हुए मसाला फसलों की ओर रुख किया। उन्होंने पिछले वर्ष एक बीघा भूमि में लगभग तीन क्विंटल हल्दी के बीजों की रोपाई की। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करते हुए चार बार निराई-गुड़ाई, मिट्टी चढ़ाने, संतुलित सिंचाई और जैविक खाद का उपयोग किया गया।

    इन प्रयासों के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 50 क्विंटल हल्दी का उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 35 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से फसल बेचकर उन्होंने करीब 1.75 लाख रुपये की आय अर्जित की। खेती में लगभग 60 हजार रुपये की लागत आई, जिसके बाद उन्हें 1.15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

    इस सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने इस वर्ष हल्दी की खेती का दायरा बढ़ाकर साढ़े चार बीघा कर दिया है। इसके साथ ही वे शकरकंद, मशरूम, धनिया, फूलगोभी और तोरई जैसी फसलों का उत्पादन कर फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

    जसविंदर सिंह का कहना है कि सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। वर्तमान में उनकी खेती से आठ से दस लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिल रहा है।

    उनकी सफलता यह साबित करती है कि नवाचार, मेहनत और वैज्ञानिक सोच के बल पर खेती को अधिक लाभदायक और रोजगारपरक बनाया जा सकता है।

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