More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशपन्ना में बारिश बनी आफत, खुले में रखा सरकारी धान सड़ा, अनाज...

    पन्ना में बारिश बनी आफत, खुले में रखा सरकारी धान सड़ा, अनाज में फूटे अंकुर

    पन्ना| मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से सरकारी अनाज की लचर और बदहाल व्यवस्था को उजागर करती हुई एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर धान खरीदी केंद्रों पर हजारों क्विंटल धान लंबे समय से खुले आसमान के नीचे बिना किसी सुरक्षा के पड़ा हुआ था। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण यह पूरा धान बुरी तरह भीग गया है, जिसके परिणामस्वरूप अब कई जगहों पर धान के ढेरों से छोटे-छोटे पौधे (अंकुरण) तक बाहर निकल आए हैं। इस गंभीर लापरवाही ने सरकारी अनाज के रखरखाव और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश में भीगकर खराब हुआ हजारों क्विंटल धान

    मिली जानकारी के अनुसार, पन्ना जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर स्थित धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए धान का समय पर सुरक्षित उठाव कर गोदामों (वेयरहाउस) तक परिवहन नहीं किया गया। इसी का नतीजा रहा कि हजारों क्विंटल अनाज खुले मैदानों में ही असुरक्षित छोड़ दिया गया। हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने इस लापरवाही की पोल खोल दी और सारा अनाज पानी में डूबकर पूरी तरह खराब हो गया।

    धान के इन विशाल ढेरों की मौजूदा स्थिति साफ बयां करती है कि महीनों से इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। लगातार पानी बरसने और नमी बढ़ने की वजह से अब अनाज सड़ने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे सरकारी खजाने को लाखों-करोड़ों रुपये के भारी वित्तीय नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

    भीगे धान में निकला अंकुरण, उड़ गई प्रशासन की नींद

    धान खरीदी केंद्रों पर सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने देखा कि भीगे हुए धान के ढेरों में से हरे-भरे पौधे उग आए हैं। जानकारों के मुताबिक, जब धान लंबे समय तक अत्यधिक नमी और पानी के संपर्क में रहता है, तो वह सड़ने लगता है और उसमें अंकुरण शुरू हो जाता है। अनाज के इस तरह पौधे बन जाने का मतलब है कि उसकी गुणवत्ता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, और अब इस अनाज का उपयोग किसी भी काम के लिए नहीं किया जा सकता।

    समय पर भंडारण न होने से बढ़ी विकट समस्या

    सरकार द्वारा हर साल किसानों की मेहनत का सम्मान करते हुए समर्थन मूल्य (MSP) पर बड़े पैमाने पर धान की खरीदी की जाती है। इसके बाद संबंधित नोडल एजेंसियों और अधिकारियों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि वे खरीदे गए अनाज को समयबद्ध तरीके से सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाएं। लेकिन पन्ना जिले में यह पूरी प्रक्रिया कागजों तक सिमट कर रह गई, जिसके कारण बारिश का पानी सीधे धान तक पहुंच गया और देखते ही देखते बर्बादी का दायरा बढ़ता चला गया।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने थोड़ी भी सक्रियता दिखाई होती और समय पर धान का उठाव कर लिया जाता, तो आज अन्नदाता की पसीने से उगाई गई फसल इस तरह बर्बाद नहीं होती। इस घटना से सरकारी प्रणालियों पर से आम जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।

    खाद्य विभाग ने शुरू की औपचारिकता और जांच

    यह पूरा मामला मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उजागर होने के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी ने मीडिया को जानकारी दी कि मामला संज्ञान में आते ही इसकी जांच शुरू कर दी गई है और पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

    विभाग का यह भी कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित समिति प्रबंधक की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध कड़े अनुशासनात्मक एक्शन लिए जाएंगे। फिलहाल, खरीदी केंद्रों से जुड़े तमाम दस्तावेजों और स्टॉक रजिस्टर की बारीकी से जांच-पड़ताल की जा रही है।

    राजस्व और सरकारी संसाधनों को भारी नुकसान

    खुले आसमान के नीचे महीनों तक पड़े रहने और बारिश में सड़ जाने के कारण सरकारी अनाज को हुए नुकसान का आकलन लाखों रुपये में किया जा रहा है। यह पूरा धान जनता के टैक्स के पैसों और सरकारी बजट से किसानों को भुगतान कर खरीदा गया था, इसलिए इस तरह की लापरवाही का सीधा असर देश और राज्य के खजाने पर पड़ता है। कृषि और भंडारण विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्यान्न का सुरक्षित भंडारण किसी भी पारदर्शी व्यवस्था की रीढ़ होता है, और इसमें होने वाली जरा सी चूक जनता के पैसों की बर्बादी का कारण बनती है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here