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    2.70 करोड़ के फर्नीचर मामले में बढ़ी मुश्किलें, 10 स्कूलों के तत्कालीन प्रधान पाठक तलब

    अंबिकापुर: सरगुजा संभाग के चर्चित 2.70 करोड़ रुपये के स्कूल फर्नीचर खरीदी घोटाले की जांच अब अपने अंतिम और निर्णायक दौर में पहुँच गई है। भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर ने इस मामले में कार्रवाई तेज करते हुए सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत 10 माध्यमिक विद्यालयों के तात्कालिक प्रधान पाठकों को समन जारी कर मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

    एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर के उप पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निर्देश पत्र में ओड़गी के विकासखंड शिक्षा अधिकारी को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि संबंधित सभी पूर्व प्रधान पाठक 4 अगस्त 2026 को अनिवार्य रूप से ACB कार्यालय में उपस्थित हों।

    2010-11 में स्वीकृत हुआ था ₹2.70 करोड़ का बजट

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजीव गांधी शिक्षा मिशन (सर्व शिक्षा अभियान) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2010-11 में माध्यमिक स्कूलों हेतु फर्नीचर क्रय करने के लिए 2.70 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। उस दौरान तत्कालीन जिला कार्यालय द्वारा विभिन्न विद्यालयों में छात्र डेस्क व बेंच की आपूर्ति का ठेका एक निजी फर्म को सौंपा गया था।

    जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि कई विद्यालयों में फर्नीचर की वास्तविक आपूर्ति को लेकर भारी संदेह है। जांच एजेंसी अब इस तथ्य की पुष्टि कर रही है कि कागजों पर दर्ज फर्नीचर वास्तव में स्कूलों तक पहुँचा भी था या नहीं। इसी सिलसिले में ACB ने संबंधित स्कूलों से मूल स्टॉक रजिस्टर, सामान प्राप्ति की रसीदें, सप्लायर फर्म के बिल और आधिकारिक सील युक्त रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।

    इन 10 स्कूलों का रिकॉर्ड खंगाल रही ACB

    जांच के घेरे में आए सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के जिन 10 माध्यमिक स्कूलों के रिकॉर्ड मांगे गए हैं, उनमें शामिल हैं:

    • बेगारीडांड

    • पचरौटेला

    • सहपुर

    • कुबेरपुर

    • परसियाखुर्द

    • नवाटोला

    • धरसड़ी

    • टोंगा

    • देवनगरा

    • बिहारपुर

    2017 से दर्ज है आपराधिक केस

    यह पूरी कार्रवाई अपराध क्रमांक 28/2017 के तहत की जा रही है। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) के साथ-साथ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत विस्तृत जांच चल रही है।

    दस्तावेजों की जांच के बाद बढ़ेंगी मुश्किलें

    जांच एजेंसी ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर माना है। सूत्रों के मुताबिक, दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के उपरांत यदि सरकारी धन के दुरुपयोग अथवा फर्जी कागजात तैयार कर भुगतान लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित तत्कालीन अधिकारियों, ठेकेदार फर्म और अन्य आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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