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    पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन से राजनीतिक जगत में शोक, उज्जैन की राजनीति को अपूरणीय क्षति

    उज्जैन| मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ एवं कद्दावर नेता पारस जैन का सोमवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके असामयिक निधन की खबर सामने आते ही प्रदेशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं, उनके समर्थकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज दोपहर ठीक तीन बजे उनके उज्जैन स्थित निज निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

    मध्य प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ थे पारस जैन

    दिवंगत पारस जैन का नाम मध्य प्रदेश भाजपा के उन चुनिंदा अनुभवी नेताओं में शुमार था, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी संगठन और शासन दोनों ही मोर्चों पर अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया था। उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक के रूप में चुने गए पारस जैन ने अपने पूरे राजनीतिक सफर के दौरान जनता के साथ अपना सीधा और गहरा जुड़ाव हमेशा बनाए रखा। अपने शांत स्वभाव, बेहद सरल कार्यशैली और पार्टी संगठन के प्रति निष्ठावान समर्पण के कारण वे भाजपा के भीतर एक विशेष पहचान रखते थे। उनके निधन को पार्टी के लिए एक अपूरणीय राजनीतिक और व्यक्तिगत क्षति माना जा रहा है।

    पारस जैन का लंबा और प्रेरणादायक राजनीतिक सफर

    अपने दशकों लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान पारस जैन ने मध्य प्रदेश सरकार में कई प्रमुख विभागों की कमान संभाली। वर्ष 2005 से 2013 के बीच उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में वन विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। इसके बाद दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

    आगे चलकर वर्ष 2016 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें ऊर्जा विभाग का दायित्व सौंपा गया। अपने संपूर्ण प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई नीतिगत व जनहितैषी फैसलों में अहम भूमिका निभाई। पार्टी संगठन के विभिन्न स्तरों पर भी वे बेहद सक्रिय रहे और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत और गहरी पकड़ मानी जाती थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें उज्जैन उत्तर सीट से उम्मीदवार नहीं बनाया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी क्षोभ के संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क में अपनी सक्रिय भूमिका लगातार जारी रखी।

    उज्जैन की सियासत में छोड़ गए गहरी छाप

    पारस जैन ने उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर हमेशा मुखर व सक्रिय रहे। स्थानीय स्तर पर उनकी छवि एक ऐसे जननेता की थी, जो आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनते थे और संगठन के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के साथ आत्मीयता से जुड़े रहते थे।

    उनके निधन की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम दिग्गज नेताओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनके उज्जैन स्थित निवास पर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। आज दोपहर तीन बजे उनके निवास से उनकी अंतिम यात्रा प्रस्थान करेगी, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की पूरी संभावना है।

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