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    शेयर बाजार की तेजी का लालच पड़ सकता है भारी, मार्जिन ट्रेडिंग में बढ़ा जोखिम

    मुंबई। भारतीय रिटेल निवेशक इन दिनों शेयर बाजार में अपनी जेब से ज्यादा ब्रोकर से उधार लिए गए पैसों के भरोसे दांव लगा रहे हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज के ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हुए बेहद चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जून महीने में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (एमटीएफ) के तहत निवेशकों का बकाया कर्ज बढ़कर 1.36 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया है। पिछले साल की तुलना में इस उधारी में 57.6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चिंताजनक पहलू यह भी है कि एक तरफ उधारी से शेयर खरीदने का रुझान तेजी से बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर कैश मार्केट में औसत दैनिक ट्रेडिंग की रफ्तार में जून के दौरान 6.7 फीसदी की गिरावट देखी गई है, जो बाजार में संभावित गिरावट की स्थिति में भारी जोखिम के संकेत दे रही है।

    कम पैसों में अधिक शेयर खरीदने की सुविधा देती है मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी

    मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए निवेशकों के पास पूरा फंड न होने पर भी वे शेयर खरीद सकते हैं। इस प्रक्रिया में ब्रोकर निवेशक से केवल 20 से 30 प्रतिशत मार्जिन मनी लेकर बाकी की पूरी रकम खुद अपनी तरफ से लगाकर शेयर खरीदवा देता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक एक लाख रुपये के शेयर खरीदना चाहता है, तो वह केवल 25,000 रुपये जमा करके बाकी के 75,000 रुपये ब्रोकर से उधारी के रूप में प्राप्त कर सकता है। शुरुआती दौर में कम पूंजी में बड़ा पोर्टफोलियो बनाने की यह सुविधा काफी आकर्षक प्रतीत होती है और बाजार की तेजी के दौर में मुनाफा कई गुना बढ़ा देती है, लेकिन बाजार के प्रतिकूल होते ही यह पूरी जमा पूंजी को समाप्त भी कर सकती है।

    ब्याज की ऊंची दरों और मार्जिन कॉल के कारण होता है दोगुना नुकसान

    एमटीएफ सुविधा का लाभ उठाने वाले निवेशकों को ब्रोकर की ओर से दी गई उधार राशि पर मुफ्त राहत नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए 12 से 18 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज चुकाना पड़ता है जो दैनिक आधार पर जुड़ता रहता है। जब तक शेयरों को बेचकर ब्रोकर का बकाया कर्ज चुकता नहीं किया जाता, तब तक यह ब्याज लगातार जारी रहता है। यदि बाजार में गिरावट के चलते शेयरों का मूल्य घटता है, तो ब्रोकर का दिया हुआ कर्ज संकट में आ जाता है और वह निवेशक से तुरंत अतिरिक्त फंड जमा करने की मांग करता है, जिसे मार्जिन कॉल कहा जाता है। यदि समय रहते मार्जिन राशि जमा नहीं की जाती, तो ब्रोकर को निवेशक के शेयरों को घाटे में भी बेचने का कानूनी अधिकार होता है, जिससे निवेशक की मूल पूंजी डूब सकती है।

    केवल अल्पकालिक ट्रेडर्स के लिए उपयोगी, दीर्घकालिक निवेशक रखें विशेष सावधानियां

    वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि एमटीएफ की सुविधा केवल उन अनुभवी ट्रेडर्स के लिए ही उपयुक्त है जो सख्त अनुशासन के साथ स्टॉप-लॉस का पालन करते हैं या केवल 2 से 5 दिनों के लिए स्विंग ट्रेडिंग करते हैं। 6 महीने या उससे अधिक समय के लिए निवेश करने वाले दीर्घकालिक निवेशकों को इस व्यवस्था से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि 12 से 18 प्रतिशत का भारी-भरकम ब्याज उनके संभावित मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर सकता है। इस सुविधा का उपयोग करते समय निवेशकों को हमेशा अपनी कुल मार्जिन सीमा का केवल एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही पेनी स्टॉक्स या स्मॉल-कैप कंपनियों के बजाय केवल निफ्टी-50 और मजबूत फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयरों में ही इस व्यवस्था का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

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