More
    Homeधर्म-समाज4 या 5 अगस्त, सावन में कब है कालाष्टमी? उज्जैन के आचार्य...

    4 या 5 अगस्त, सावन में कब है कालाष्टमी? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और प्रभावशाली मंत्र

    हिंदू धर्म में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है, जो भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत करने से भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा तथा शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है. तंत्र साधना और भैरव उपासना करने वालों के लिए यह तिथि विशेष महत्व रखती है. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा के साथ विशेष मंत्रों का जाप करने पर आर्थिक परेशानियां, मानसिक तनाव और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं. उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं सावन मास की कालाष्टमी की सही तिथि, व्रत की महिमा और प्रभावशाली मंत्र.

    वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण अष्टमी तिथि पांच अगस्त को शाम 8 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी जबकि इस तिथि का समापन 06 अगस्त को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में मान्यता के अनुसार, इस साल सावन की कालाष्टमी पांच अगस्त को मनाई जाएगी.
    कालाष्टमी व्रत की महिमा
    काल भैरव को भगवान शिव का उग्र, न्यायप्रिय और रक्षक स्वरूप माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कालाष्टमी पर विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं. भक्तों को पापों से मुक्ति, कष्टों से राहत और शिव कृपा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई उपासना राहु दोष के प्रभाव को कम करने में भी सहायक मानी जाती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है.

    महाकाल की नगरी में विशेष महत्व
    उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में क्षिप्रा नदी किनारे स्थित भगवान काल भैरव का मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां काल भैरव भगवान को प्रसाद के रूप में शराब अर्पित की जाती है. खास बात यह है कि पुजारी जब शराब का प्याला भगवान के मुख से लगाते हैं, तो वह देखते ही देखते गायब हो जाती है. इस अद्भुत चमत्कार को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं और आस्था से नतमस्तक होते हैं.

    जरूर करें इन मंत्रों का जाप
    – ॐ शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
    – ॐ कालभैरवाय नम:
    – ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्
    – धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here