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    आषाढ़ अमावस्या पर धरती पर आते हैं पितर, इस दिन जरूर कर लें बस यह 1 काम, पितर भर भरके देंगे आशीर्वाद

    आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि इस बार बेहद खास होने वाली है, इस बार यह शुभ तिथि 25 जुलाई दिन बुधवार को है. इस दिन दर्श, अन्वाधान और आषाढ़ अमावस्या का योग बन रहा है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के तर्पण करने का विशेष महत्व है. अगर आप तीर्थ स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही जल में काले तिल डालकर स्नान करने से पापों का शमन होता है. आषाढ़ अमावस्या विशेष रूप से पितृ, तर्पण, स्नान, दान और ग्रह दोष निवारण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंचांग के अनुसार, इस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है लेकिन राहुकाल का समय दोपहर 12:24 से 02:09 बजे तक रहेगा.
    अमावस्या तिथि पर करें इन चीजों का दान
    हर मास की अमावस्या तिथि को दर्श अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. अमावस्या तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. दर्श शब्द का अर्थ है देखना या दर्शन करना और अमावस्या उस दिन को कहते हैं जब चंद्रमा आकाश में अदृश्य होता है. अमावस्या के दिन पितरों के नाम अन्न, वस्त्र, काला तिल, तेल, जूता-चप्पल, छाता आदि का दान अत्यंत पुण्यदायक है. साथ ही इस दिन की रात्रि को मौन, एकांत, दीप जलाकर साधना करना फलवर्धक माना गया है.

    पितरों को समर्पित है आषाढ़ अमावस्या
    वैदिक ग्रंथों के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और जलदान के लिए सर्वोत्तम मानी गई है. जो व्यक्ति पितृदोष, अनजाने पूर्वजों की बाधा या कुल की रुकावटें झेल रहे हों, उन्हें इस दिन तर्पण करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं. यह दिन पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन दान और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष की समस्या का भी समाधान होता है.

    25 जून को आषाढ़ अमावस्या
    पंचांग के अनुसार, दर्श अमावस्या का शुभ मुहूर्त 24 जून की शाम 6 बजकर 59 मिनट से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 25 जून को दोपहर 4 बजे होगा. ऐसे में आषाढ़ मास की अमावस्या का पर्व 25 जून दिन बुधवार को मनाया जाएगा.

    आषाढ़ अमावस्या को अन्वाधान व्रत
    पुराणों में अमावस्या के दिन अन्वाधान व्रत का उल्लेख है. यह व्रत मुख्य रूप से वैष्णव संप्रदाय में अमावस्या के दिन मनाया जाता है. अन्वाधान का अर्थ है, हवन के बाद अग्नि को प्रज्वलित रखने के लिए उसमें ईंधन जोड़ना. यह व्रत भगवान विष्णु और अग्नि की पूजा से संबंधित है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो पितृदोष, कुल बाधा, संतान रुकावट, अथवा वंश रुकने जैसी समस्याओं से ग्रस्त हों.
    आषाढ़ अमावस्या का महत्व
    आषाढ़ मास की अमावस्या को विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह वर्षा ऋतु के प्रारंभ का संकेत देती है और पितृ तर्पण, व्रत, साधना एवं दान के लिए शुभ मानी जाती है. इस दिन गंगा स्नान, पीपल पूजन और श्राद्धकर्म करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है. जब चांद नहीं होता, तब आंतरिक शांति और ध्यान के लिए उपयुक्त वातावरण बनता है. योगी और साधक इस दिन साधना करते हैं.

    आषाढ़ अमावस्या 2025 उपाय
    उपाय के रूप में इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना, पीपल के वृक्ष पर कच्चा दूध और काला तिल चढ़ाना चाहिए. इसके साथ ही कौओं, गायों और कुत्तों को भोजन कराने का भी महत्व पता चलता है, जिससे पितृ दोष शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

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