लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया। सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले और विपक्ष के आचरण पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट में किसी भी साधु-संत को दोषी नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का निरंतर अपमान करने वाले सपा और कांग्रेस जैसे दल अब साधु-संतों और 1100 कर्मचारियों पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
सनातन और उत्तर प्रदेश की छवि खराब करने की साजिश
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने सरयू नदी को रक्तरंजित किया था और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण ठुकराया था, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। इस प्रकरण में पकड़े गए आरोपियों का भाजपा या साधु-संतों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन को बाधित करने की कुत्सित कोशिश में लगे हैं। यूपी अब बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान सपा का हंगामा
विधानसभा के भीतर अनुपूरक बजट पेश होने के बाद जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना वक्तव्य देने के लिए खड़े हुए, तब समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर मुद्दे पर पहले चर्चा की मांग को लेकर वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। सीएम ने विपक्षी रवैये को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि एजेंडा पहले से तय होने के बावजूद विपक्ष जनता के अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा से भाग रहा है और संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहा है।
तस्वीर लहराने पर सपा विधायक पर गाज
सदन की कार्यवाही के दौरान जसराना (फिरोजाबाद) से सपा विधायक सचिन यादव ने मुख्यमंत्री से जुड़ी एक विवादित तस्वीर पर नारा लिखकर प्रदर्शित किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा ऐतराज जताते हुए विधायक को तत्काल सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।
सदस्यता समाप्त करने की चेतावनी के बाद सदन स्थगित
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सपा विधायक के कृत्य पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मामले को एथिक्स कमेटी (आचार समिति) को भेजने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी अमर्यादित पुनरावृत्ति दोबारा होती है, तो विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाकर विधायक की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। इस तीखे घटनाक्रम और विपक्ष के शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।


