अतिशय क्षेत्र तिजारा में करुणा का भावपूर्ण दृश्य, घायल कबूतर के अंतिम क्षणों में गूंजा नमोकार मंत्र
तिजारा। अतिशय क्षेत्र देहरा स्थित श्री चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर में जीवदया का अनूठा मामला देखने को मिला।जैन आर्यिका विमर्शिताश्री माताजी ने मंदिर परिसर में एक घायल कबूतर को नमोकार मंत्र सुनाकर उसका समाधमरण कराया। इन मंत्रोच्चार के बीच उसने दम तोड़ दिया। माताजी के जीव प्रेम को देखकर वहां उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, जैन मंदिर में मंगलवार को दिगंबर आचार्य संघ की आहारचर्या चल रही थी। श्रद्धालुओं की भारी चहल-पहल थी। इसी दौरान आसमान में काले बादल छा गए। गड़गड़ाहट के साथ आसमान से बिजली मंदिर परिसर में स्थित मानसतंभ पर आ गिरी। बिजली का झटका इतना तीव्र था कि मानसतंभ के शीर्ष पर बैठा एक कबूतर उसकी चपेट में आ गया। वह अचेत होकर सीधे संगमरमरी फर्श पर आ गिरा।
आर्यिका विमर्शिताश्री माताजी की करुणा
जैसे ही वह बेजुबान पक्षी अचेत अवस्था में नीचे गिरा, प्रांगण में सन्नाटा पसर गया। इस दृश्य पर आर्यिका विमर्शिताश्री माताजी की दृष्टि पड़ी। माताजी बिना पल गंवाए घायल पक्षी के समीप पहुँचीं। माताजी ने उस कबूतर को भव्य जीव के रूप में देखा। उसके अंतिम क्षणों को धार्मिक बनाने का संकल्प लिया।
समाधिमरण की मंगल भावना
माताजी ने अत्यंत श्रद्धा के साथ उस अचेत कबूतर को नमोकार महामंत्र का पाठ सुनाना प्रारंभ किया। उन्होंने उस जीव के लिए समाधिमरण की मंगल भावना की। थोड़ी देर में कबूतर ने प्राण त्याग दिए।
भावविभोर हुए श्रद्धालु
यह दृश्य देखकर सैकड़ों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कई श्रद्धालुओं की आँखों में आँसू छलक आए। मंदिर में मौजूद भक्तजनों का कहना था कि तिजारा की इस अतिशय भूमि पर आज केवल एक पक्षी का प्राणांत नहीं हुआ, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से समाधिमरण की महिमा का साकार रूप देखने को मिला। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए विशेष जाप और प्रार्थना का आयोजन किया गया।
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