जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कुलसचिव डॉ. दीपशंकर सोनवाल द्वारा पूर्व में सख्त निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों के तहत विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग से फाइलें बिना कुलसचिव की अनुमति के आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थीं। हालांकि, वर्तमान में विभिन्न विभागों के अधिकारी इन आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं। मप्र विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 15 और 16 तथा परिनियम 3 के प्रावधानों को नजरअंदाज कर फाइलों को सीधे प्रेषित किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
कुलसचिव कार्यालय को नहीं दी जा रही जानकारी
विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक विभागों में वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों को रोकने के लिए व्यवस्था बनाई गई थी। इसके विपरीत, मैदानी स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी नियमों की परवाह किए बिना कार्य कर रहे हैं। उच्च स्तर से जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई फाइलें सीधे आगे बढ़ाई जा रही हैं और कुलसचिव कार्यालय को इसकी समय पर जानकारी नहीं दी जा रही है। इस प्रकार की कार्यशैली से प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
वैधानिक प्रावधानों और नियमों का उल्लंघन
मप्र विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 15-सी और 16-6 के साथ परिनियम-3 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख, कॉमन सील और संपत्ति के वैधानिक संरक्षक केवल कुलसचिव होते हैं। इसके बावजूद विभिन्न शाखाओं में फाइलों को नियमों के विपरीत सीधे अन्य अधिकारियों के पास भेजा जा रहा है। इस अनियमितता को रोकने के लिए ही पूर्व में आदेश जारी किया गया था कि कोई भी पत्रावली कुलसचिव के संज्ञान में लाए बिना आगे प्रक्रियाधीन नहीं की जाएगी।
ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की आशंका और चेतावनी
सूत्रों के अनुसार, नियमों को दरकिनार कर फाइलें आगे बढ़ाए जाने से कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ मिलने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा न्यायालयीन मामलों से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों की जानकारी भी कुलसचिव को समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति दस्तावेज साझा करेगा या फाइल आगे बढ़ाएगा, तो उसके खिलाफ सेवा आचरण नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


