जयपुर: राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी, मानव तस्करी और साइबर ठगी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद इस सनसनीखेज मामले में अब तक कुल आठ आरोपियों को दबोचा जा चुका है।
विदेशों में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को बंधक बनाने का खेल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह शातिर गिरोह भारतीय युवाओं को विदेश में आकर्षक और मोटी तनख्वाह वाली नौकरियों का प्रलोभन देता था। इसके बाद उन्हें कंबोडिया, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में भेजकर वहां साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बना लिया जाता था, जहां उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी का काम कराया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों के काले कारनामों और भूमिका का खुलासा
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि फिरोज सोशल मीडिया पर महिला बनकर फर्जी क्रिप्टो निवेश में लोगों को फंसाता था, कानू सिंह कमीशन के लालच में युवाओं को स्कैम कंपाउंड तक पहुंचाता था, और आरिफ फर्जी प्रोफाइल के जरिए नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ठगी की वारदातों को अंजाम देता था।
वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच और आमजन के लिए जरूरी एडवाइजरी
पुलिस अब कोलकाता से पहले पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल साक्ष्यों, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट और क्रिप्टोकरेंसी खातों के आधार पर इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले कंपनी का सत्यापन जरूर करें और सोशल मीडिया पर लुभावने निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें।


