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    TCS धर्म परिवर्तन केस में बड़ा खुलासा, AIMIM पार्षद गिरफ्तार; बुलडोजर एक्शन भी हुआ

    छत्रपति संभाजीनगर| महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ बहुचर्चित धर्म परिवर्तन मामले में नामजद टीसीएस (TCS) की पूर्व कर्मचारी निदा खान को कथित तौर पर शरण (पनाह) देने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे AIMIM (एआईएमआईएम) पार्षद मतीन पटेल को आखिरकार पुलिस ने धर दबोचा है। अदालत द्वारा बार-बार समन भेजने के बावजूद पेश न होने के कारण उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इसी वारंट के आधार पर गुरुवार शाम को पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया और आगे की पूछताछ के लिए उन्हें नासिक रवाना कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के साथ ही स्थानीय प्रशासन ने आरोपी पार्षद के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण से जुड़े मामलों में पहले से ही कई एफआईआर दर्ज हैं और संबंधित कंपनी टीसीएस ने भी अपने অভিযুক্ত कर्मचारियों को पहले ही निलंबित कर दिया है।

    आखिर क्यों हुई पार्षद मतीन पटेल की गिरफ्तारी?

    पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल पर मुख्य रूप से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की पूर्व महिला कर्मचारी निदा खान को छिपने में मदद करने और उसे अपने यहाँ पनाह देने का आरोप है। निदा खान का नाम एक कथित अवैध धर्म परिवर्तन के मामले में सामने आने के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस पूरी कानूनी जाँच के दौरान अदालत की तरफ से कई बार समन जारी किए गए, लेकिन मतीन पटेल एक बार भी अदालत के सामने पेश नहीं हुए। इसी लगातार जारी गैर-हाजिरी और टालमटोल के बाद अदालत ने उनके खिलाफ कड़ा गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

    क्या है पूरा टीसीएस (TCS) धर्म परिवर्तन का यह मामला?

    जाने-माने कॉरपोरेट संस्थान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की पूर्व कर्मचारी निदा खान को महाराष्ट्र के नासिक शहर में स्थित कंपनी की यूनिट में सामने आए कथित धर्म परिवर्तन से जुड़े विवादित मामले में नाम आने के बाद नौकरी से बर्खास्त (निलंबित) कर दिया गया था। लगभग 25 दिनों तक पुलिस की पकड़ से दूर फरार रहने के बाद, गत 7 मई को उसे छत्रपति संभाजीनगर इलाके के एक किराए के फ्लैट से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया था।

    मामले की शुरुआत और पीड़िता के आरोप

    यह पूरा सनसनीखेज मामला तब प्रकाश में आया जब एक पीड़ित महिला ने अपने ही सहकर्मी दानिश शेख के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप था कि दानिश शेख ने वर्ष 2022 में उससे शादी का झूठा और फर्जी वादा करके कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जबकि हकीकत यह थी कि वह पहले से ही किसी अन्य महिला के साथ वैवाहिक बंधन में बंधा हुआ था। पुलिस में दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के मुताबिक, मुख्य आरोपी दानिश शेख की बहन निदा खान पर यह गंभीर आरोप है कि उसने कथित तौर पर पीड़िता की धार्मिक आस्था का अपमान किया और उस पर लगातार अपना धर्म बदलने का भारी दबाव बनाने की कोशिश की।

    पुलिस जाँच में सामने आए अन्य गंभीर आरोप

    कानून प्रवर्तन एजेंसियां और पुलिस इस मामले में महिला कर्मचारियों के कथित शारीरिक व मानसिक शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयासों, धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने, छेड़छाड़ और उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ अलग-अलग मामलों की समानांतर जाँच कर रही हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार, निदा खान पर मुख्य रूप से यह आरोप है कि उसने एक पीड़ित महिला को बुर्का और विशेष धार्मिक साहित्य देकर उसका कथित तौर पर ब्रेनवॉश करने का कुत्सित प्रयास किया था।

    इसके अलावा, उस पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने पीड़िता के मोबाइल फोन में इस्लाम धर्म से जुड़े कुछ विशेष एप्स जबरन इंस्टॉल करवाए, उसे अपने घर बुलाकर नमाज़ पढ़ने का पूरा तरीका सिखाया और यहाँ तक कि उसे हिजाब पहनने के सही तरीके की भी ट्रेनिंग दी थी।

    कैसे मिली थी आरोपी निदा खान को जमानत?

    बीते महीने नासिक की एक स्थानीय अदालत ने आरोपी निदा खान को सशर्त जमानत दे दी थी। उसने अदालत के सामने अपनी गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) का हवाला देते हुए जमानत देने का विशेष अनुरोध किया था। उस दौरान अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह उल्लेख किया था कि किसी भी महिला के लिए जेल की सलाखों के पीछे एक नए बच्चे को जन्म देना बेहद अमानवीय और पीड़ादायक स्थिति होती है। इस संदर्भ में अदालत ने अपने आदेश में ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों का भी जिक्र किया था।

    कंपनी टीसीएस (TCS) द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई

    इस पूरे प्रकरण में अपनी कंपनी का नाम आने के बाद टीसीएस (TCS) प्रबंधन ने त्वरित और कड़ा रुख अपनाते हुए इस विवाद से जुड़े अपने सभी संलिप्त कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कंपनी की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वह अपने कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव, अनैतिक व्यवहार या जबरदस्ती के मामलों में 'ज़ीरो टॉलरेंस' (बर्दाश्त न करने की नीति) की नीति का कड़ाई से पालन करती है और ऐसे मामलों में हमेशा सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।

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