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    Gen Z पर भागवत की टिप्पणी से सियासत गरमाई, प्रियंका गांधी ने दिया जवाब

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया 'इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' कार्यक्रम में युवाओं से संवाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में घमासान शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने करीब दो हजार 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' के सदस्यों को संबोधित किया था, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    प्रियंका गांधी का पलटवार, कहा- हमें आरएसएस प्रमुख से किसी भी प्रकार के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है

    आरएसएस प्रमुख के युवाओं के साथ संवाद और उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की प्रमुख नेत्री प्रियंका गांधी ने सीधा निशाना साधा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि उन्हें और उनकी पार्टी को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से किसी भी तरह के प्रमाण पत्र या सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है। इस बयान के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी संघ प्रमुख को घेरना शुरू कर दिया है।

    केसी वेणुगोपाल ने उठाए गंभीर सवाल, गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर हुए अत्याचारों का मुद्दा उठाया

    कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मोहन भागवत के इस संवाद को महज दिखावा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यदि संघ प्रमुख को वाकई 'जेन ज़ेड' की फिक्र है, तो उन्हें देश के गृह मंत्री से इस्तीफा मांगने के लिए कहना चाहिए या फिर संसद में आकर छात्रों से माफी दिलवानी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों, पेलेट गन के इस्तेमाल और इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।

    छात्रों और पुलिस झड़प पर भागवत का बयान, कहा- बिना संपूर्ण तथ्यों और प्रमाणित जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं

    कार्यक्रम के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के सवाल पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि उनके पास इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी नहीं है, इसलिए बिना पुख्ता तथ्यों के कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे देश के युवाओं पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, लेकिन मीडिया या अन्य माध्यमों से सामने आ रही रिपोर्टों में असामाजिक तत्वों के शामिल होने की आशंकाओं को भी नकारा नहीं जा सकता, इसलिए सत्यता की जांच बेहद जरूरी है।

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