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    Homeस्वास्थ्यसिर्फ पढ़ाई नहीं, बच्चों के लिए खेलना भी जरूरी; जानिए क्यों

    सिर्फ पढ़ाई नहीं, बच्चों के लिए खेलना भी जरूरी; जानिए क्यों

    किताबी शिक्षा और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी बच्चों के संपूर्ण जीवन के लिए बहुत आवश्यक होता है। इसके बिना किसी भी बच्चे का सर्वांगीण और संपूर्ण विकास होना असंभव है। यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे का विकास पूरी तरह स्वस्थ और प्राकृतिक तरीके से हो, तो उसके लिए बच्चों को मैदानी खेल खेलना बहुत जरूरी है। यदि आपके बच्चे किसी भी प्रकार का खेल नहीं खेलेंगे, तो न तो उनके शरीर का सही ढंग से विकास होगा और न ही वे शारीरिक रूप से सक्रिय व ऊर्जावान रह पाएंगे। इसके विपरीत, शारीरिक सक्रियता न होने के कारण बच्चे कम उम्र में ही मोटापे का शिकार होने लगते हैं। एक जागरूक माता-पिता (पालक) होने के नाते आपको यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि बच्चे के शुरुआती जीवन में खेलकूद के कितने महत्वपूर्ण लाभ हैं। यदि आप अपने बच्चों को उनके बचपन में खेलने-कूदने से रोकते हैं, तो समझ लीजिए कि आप वास्तव में उनका सहज बचपन उनसे छीन रहे हैं।

    आज के समय में यह एक बड़ी विडंबना है कि बहुत से आधुनिक स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त खेल के मैदान (ग्राउंड) ही नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में एक जिम्मेदार अभिभावक के रूप में आपको यह प्रयास करना चाहिए कि स्कूल के बाद आप अपने बच्चे को रोजाना खेलने के लिए किसी पार्क या मैदान में जरूर भेजें। इस तरह की छोटी-छोटी कोशिशें आपको एक बेहतर और समझदार पालक बनाती हैं।

    खेलों के जरिए बच्चे सीखते हैं सामाजिकता

    जब आपका बच्चा विभिन्न प्रकार के खेलों में हिस्सा लेता है, तो उसके भीतर सामाजिक कौशल (सोशल स्किल्स) का बहुत ही शानदार विकास होता है। खेल के मैदान पर आपका बच्चा अन्य बच्चों से मिलता है, उनके साथ समय बिताता है और आपसी बातचीत करता है। यह मेल-जोल उसके संपूर्ण सामाजिक दायरे और व्यक्तित्व के विकास में बहुत सहायक होता है।

    मिलजुलकर काम करने की भावना (टीम वर्क)

    मैदान पर खेले जाने वाले सामूहिक खेलों में भाग लेने से बच्चा सीखता है कि किस तरह एक टीम का हिस्सा बनकर अपनी पूरी टीम की विजय में महत्वपूर्ण योगदान दिया जाता है। इससे उनमें आपसी सहयोग और सामंजस्य की भावना पैदा होती है।

    मानसिक और बौद्धिक विकास

    जब बच्चे किसी भी तरह का शारीरिक खेल खेलते हैं, तो केवल उनके शरीर की ही कसरत नहीं होती, बल्कि उनके मस्तिष्क का भी भरपूर विकास होता है। खेलकूद से जुड़ी गतिविधियाँ बच्चे की मानसिक क्षमता को तेज करती हैं, जिससे उन्हें नई चीजें जल्दी सीखने और जीवन में आगे बढ़ने में बहुत मदद मिलती है।

    खेलों से होता है मजबूत शारीरिक विकास

    • मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती: खेलकूद या किसी भी प्रकार की अन्य शारीरिक गतिविधियों से बच्चों की मांसपेशियों और हड्डियों का प्राकृतिक रूप से विकास होता है। स्वस्थ हड्डियों और मजबूत मांसपेशियों के निर्माण के लिए आपको अपने बच्चे को रोजाना किसी न किसी खेल में भाग लेने के लिए हमेशा उत्साहित करना चाहिए।

    • बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी): जब आपका बच्चा खेल-कूद में सक्रिय रूप से भाग लेता है, तो उसकी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा होता है। इसके अलावा, बच्चे को ताजी हवा में खेलने के लिए छोड़ना बहुत फायदेमंद होता है, ताकि उसे अपने आसपास के प्राकृतिक परिवेश और पर्यावरण का भी सही ज्ञान हो सके।

    • जीत और हार का पाठ: खेलों के माध्यम से ही बच्चे यह सीखते हैं कि जीवन में हार और जीत दोनों सिक्के के दो पहलू हैं और यह खेल का ही एक अनिवार्य हिस्सा है। यह सीख उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।

    • शारीरिक सहनशीलता का विकास: खेल की गतिविधियों से बच्चों की शारीरिक सहनशीलता (स्टेमिना) बढ़ती है, क्योंकि हर खेल को अंत तक पूरे जोश के साथ खेला जाता है। इससे बच्चा सीखता है कि विपरीत परिस्थितियों या धूप-गर्मी में भी खुद को कैसे ऊर्जावान बनाए रखना है।

    • खेल किसी भी खिलाड़ी की सहनशक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती के समान होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को ऐसे खेलों में जरूर शामिल करें जिससे उनका स्टेमिना और शारीरिक बल दोनों मजबूत हो सकें।

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