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    Homeधर्म-समाजमंगलवार को सावन शिवरात्रि का संयोग, ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा

    मंगलवार को सावन शिवरात्रि का संयोग, ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा

    उज्जैन। सावन मास के इस पावन दौर में आज का मंगलवार कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। आज जहां एक तरफ सावन शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत भी है। धार्मिक पंचांग के अनुसार आज के दिन भगवान शिव, माता गौरी और संकटमोचन हनुमानजी की एक साथ उपासना करने का विशेष विधान माना गया है, जिससे जीवन के तमाम कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    शिवरात्रि, मंगला गौरी और हनुमान पूजा का महासंयोग

    आज सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, सिद्धि योग और विशेष नक्षत्रों का अद्भुत मिलन हुआ है। मंगलवार का दिन होने के कारण बजरंगबली की पूजा का भी खास महत्व है, जो भक्तों में साहस, आत्मविश्वास और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का भाव जगाता है। वहीं सावन के प्रत्येक मंगलवार को सुहागिन महिलाएं माता गौरी की विधि-विधान से पूजा कर अपने सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। आज के दिन व्रत रखने से शिव-परिवार और हनुमानजी की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है और कुंडली में मौजूद ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव भी क्षीण होते हैं।

    विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा की विधि

    आज के इस पावन दिन की शुरुआत सुबह स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनने और व्रत का संकल्प लेने के साथ होती है। शिवभक्तों को शिवलिंग का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, आक और सफेद फूल अर्पित करने चाहिए। इसके अलावा चंदन, अक्षत और नैवेद्य चढ़ाकर शिव मंत्रों का जाप करना बेहद फलदायी होता है। शाम के समय प्रदोष काल और रात्रि में शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगला गौरी व्रत के दौरान माता को सुहाग की सामग्री, फल और मिठाई भेंट की जाती है, जिससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और शांति बनी रहती है। साथ ही, हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल पुष्प चढ़ाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय दूर होता है और मनोबल मजबूत होता है।

    पंचांग और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति

    पंचांग के अनुसार आज सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान हैं। चंद्रमा सुबह दस बजकर नौ मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र में रहने के पश्चात पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। आज का दिन मंगलवार होने के साथ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो रात्रि एक बजकर बवपन मिनट तक रहेगी। सूर्योदय सुबह पांच बजकर उंचास मिनट पर हुआ और सूर्यास्त शाम सात बजकर पांच मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय अलसुबह पांच बजकर नौ मिनट और चंद्रास्त शाम छह बजकर नौ मिनट पर निर्धारित है। आज यात्रा आदि के लिए उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा, जिसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    प्रमुख शुभ और अशुभ मुहूर्त

    आज के दिन कार्यों को सफलता पूर्वक संपन्न करने के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह चार बजकर तेईस मिनट से पांच बजकर छह मिनट तक रहा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर बारह बजे से बारह बजकर तिरपन मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर दो बजकर चालीस मिनट से तीन बजकर तैंतीस मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह सात बजकर उन्सठ मिनट से नौ बजकर पच्चीस मिनट तक रहेगा, जबकि रात्रि में बारह बजकर छह मिनट से निशिता मुहूर्त शुरू होगा। वहीं दूसरी ओर, राहुकाल दोपहर तीन बजकर छियालीस मिनट से शाम पांच बजकर पच्चीस मिनट तक रहेगा, जिसमें किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

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