थानागाजी। समीपवर्ती जोधावास गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को बरामदे का पटाव अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि जिस समय पटाव गिरा, उस दौरान मौके पर कोई छात्र-छात्रा या शिक्षक मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार विद्यालय भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से विगत वर्षों में भवन को ध्वस्त करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक भवन को गिराने अथवा सुरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पटाव गिरने की सूचना के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसको लेकर छात्र-छात्राओं में रोष देखने को मिला। विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन कर जर्जर भवन के संबंध में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल विद्यालय प्रबंधन की ओर से टेंट लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था में विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने मांग की है कि जर्जर भवन को तत्काल हटाकर विद्यालय के लिए सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
झालावाड़, करौली और बीकानेर में सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
झालावाड़, जुलाई 2025: मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। हादसे में 7 बच्चों की मौत और 20 से अधिक बच्चे घायल हुए थे। इस घटना के बाद प्रदेशभर के स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे।
करौली, जुलाई 2025: झालावाड़ हादसे के बाद करौली जिले में भी एक सरकारी स्कूल की जर्जर छत ढह गई थी। गनीमत रही कि घटना स्कूल शुरू होने से पहले हुई और बच्चे सुरक्षित बच गए।
प्रतापगढ़, जुलाई 2025: सुहागपुरा क्षेत्र के बोरखेड़ा गांव के सरकारी विद्यालय की जर्जर हालत सामने आई थी। विद्यालय के बरामदे की छत पहले ही गिर चुकी थी और ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
बीकानेर, जुलाई 2026: तोलियासर गांव के सरकारी स्कूल की जर्जर छत स्कूल खुलने के बाद गिर गई। गनीमत रही कि उस समय छात्र कक्षा में मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था।
सवाल: हादसे होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय क्या प्रशासन को पहले से चिन्हित जर्जर स्कूल भवनों को समय रहते सुरक्षित या ध्वस्त नहीं करना चाहिए?


