जालंधर: पंजाब के युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगी और आपराधिक वारदातों का एक गंभीर मामला सामने आया है। फिल्लौर के गांव भैणी निवासी 30 वर्षीय राकेश कुमार समेत तीन पंजाबी युवकों को केन्या में एक कुख्यात गिरोह द्वारा बंधक बनाए जाने की घटना से परिवारों में कोहराम मच गया था। अपहरणकर्ताओं ने बंधक बनाए गए राकेश के साथ बेरहमी से मारपीट की और उसका एक डरावना वीडियो व्हाट्सऐप के जरिए उसके परिजनों के पास भेज दिया। उसकी सुरक्षित रिहाई के एवज में 70 हजार अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 58 लाख रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग की गई थी।
राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार के कड़े हस्तक्षेप के बाद अब तीनों युवकों को सकुशल छुड़ा लिया गया है। वहीं, पीड़ित परिवार ने इस पूरी साजिश में शामिल कथित ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इटली भेजने के नाम पर तय हुआ था सौदा
राकेश के पिता कश्मीर लाल ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बेटे को विदेश (इटली) भेजने के लिए दो एजेंटों से संपर्क किया था। इनमें से एक एजेंट परमजीत सिंह है, जो फिलहाल इटली में रहता है, जबकि उसकी महिला सहयोगी पास ही के गांव भारसिंहपुर की रहने वाली बताई जा रही है। इन दोनों एजेंटों ने राकेश को इटली भेजने के लिए कुल 9.50 लाख रुपये में सौदा तय किया था।
बातचीत पक्की होने के बाद परिजनों ने बतौर एडवांस दो लाख रुपये महिला एजेंट के भाई को सौंप दिए थे। तय समझौते के अनुसार, शेष बची हुई रकम राकेश के सुरक्षित इटली पहुंचने के बाद दी जानी थी। एजेंटों ने परिवार को योजना बताई थी कि राकेश को पहले कानूनी तरीके से केन्या भेजा जाएगा और वहां से फ्लाइट के जरिए उसे इटली के लिए रवाना किया जाएगा।
जयपुर से दुबई होते हुए केन्या पहुंचा था राकेश
परिजनों के मुताबिक, एजेंटों ने तय कार्यक्रम के अनुसार 5 अगस्त को राकेश की जयपुर से केन्या के लिए उड़ान बुक कराई थी, जिसका रास्ते में दुबई का स्टॉपओवर था। केन्या की धरती पर कदम रखते ही वहां सक्रिय एक स्थानीय आपराधिक गिरोह ने राकेश और उसके साथ मौजूद दो अन्य पंजाबी युवकों को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन्हें बंधक बना लिया।
अगले दिन यानी 6 अगस्त को अपहरणकर्ताओं ने राकेश की निर्ममता से पिटाई की और उसका वीडियो व्हाट्सऐप के माध्यम से उसके घर भेज दिया। फोन पर धमकी दी गई कि अगर अगले 5 घंटों के भीतर 70 हजार डॉलर नहीं पहुंचाए गए, तो इसके परिणाम बेहद घातक होंगे। परिवार का दावा है कि फोन पर खुद को 'खान बाबा' बताने वाला एक कथित गैंगस्टर पंजाबी भाषा में बात कर रहा था। बाद में अंग्रेजी में मैसेज भेजकर यह दावा किया गया कि राकेश पूरी तरह उसकी कस्टडी में है और उसे पड़ोसी देश युगांडा में छिपाकर रखा गया है।
एजेंट और बदमाशों के बीच पैसों के लेनदेन का विवाद
पीड़ित परिवार के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया कि उनका मुख्य एजेंट परमजीत सिंह के साथ पैसों के लेन-देन को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। इसी आपसी वित्तीय विवाद के कारण राकेश और अन्य युवकों को मोहरा बनाकर बंधक बनाया गया था। बदमाशों ने दोटूक कहा था कि जब तक परमजीत सिंह उनका बकाया पैसा नहीं चुका देता, तब तक वे किसी को नहीं छोड़ेंगे।
परिवार का आरोप है कि इस संकट के समय मुख्य एजेंट परमजीत सिंह ने उनका फोन उठाना तक बंद कर दिया था। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक स्तर पर मदद के प्रयास शुरू हुए, जिसके बाद केंद्र सरकार के दखल से युवकों की वतन वापसी का रास्ता साफ हो सका। पीड़ित परिवार ने सरकार से मांग की है कि ऐसे फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के नर्क जैसे हालातों का सामना न करना पड़े।


