साहित्यिक रंगों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, 16 अगस्त को 11 पौधों से संवरेगा निर्वाणवन
अलवर। अलवर की प्रतिष्ठित एवं सक्रिय साहित्यिक-सामाजिक संस्था ‘सृजक’ की ओर से अगस्त माह का साहित्यिक कार्यक्रम इस बार डढ़ीकर स्थित निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर में आयोजित किया जाएगा। 16 अगस्त, रविवार को होने वाली ‘पावस गीत-ग़ज़ल गोष्ठी’ में शहर के साहित्यकार पावस ऋतु की भावनाओं को गीत, कविता और ग़ज़ल के माध्यम से अभिव्यक्त करेंगे। कार्यक्रम के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए परिसर में विभिन्न फल-फूल प्रजातियों के 11 पौधे भी लगाए जाएंगे।
सृजक संस्थान के सचिव रामचरण ‘राग’ ने बताया कि पावस गीत-ग़ज़ल गोष्ठी स्वामी निर्वाण बोधिसत्व की अध्यक्षता में संपन्न होगी। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार रघुवर दयाल जैन मुख्य अतिथि तथा गीतकार गिरवर सिंह बाँकावत और प्रदीप भारद्वाज विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
साहित्यकारों के साथ पौधारोपण की पहल
आयोजन के दौरान निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर में साहित्यकारों द्वारा विभिन्न फल एवं फूलदार प्रजातियों के 11 पौधे लगाए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि साहित्य और प्रकृति दोनों ही मानव जीवन को संवेदनशील एवं समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना के साथ साहित्यिक आयोजन को पौधारोपण अभियान से जोड़ा गया है।
कार्यक्रम में सृजक के संरक्षक भरत सिंह अहरोदिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’, उपाध्यक्ष खेमेन्द्र सिंह चन्द्रावत, रेणु मिश्रा, कोषाध्यक्ष हेमराज सैनी और प्रवक्ता मुकेश मीणा सहित संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य डॉ. वेद प्रकाश यादव ‘सहज’, वरिष्ठ कवि प्रदीप माथुर, ग़ज़लकार डॉ. शिवचरण चैड़वाल, डॉ. मयंक रोहिताश्व गर्ग, गीतकार पुरुषोत्तम शर्मा, वरिष्ठ कवि रवीन्द्र मिश्रा, युवा कवि प्रेम शर्मा, देवांश जांगिड़, जगदीश प्रसाद भारद्वाज, हास्य कवि नरेंद्र शर्मा और कवयित्री श्रद्धा जैन अपनी रचनाओं एवं उपस्थिति से कार्यक्रम को साहित्यिक रंग देंगे।
कार्यक्रम में बाँसुरी वादक सुभाष नकड़ा, स्पोर्ट्स कोच घनश्याम शर्मा, रंगकर्मी महेंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता दया गर्ग एवं नीलू जौनवाल, शिक्षाविद अंजू नकड़ा, कैलाश चंद सैनी, हरि नारायण, मुकेश मीणा एवं प्रदीप सैनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहेंगे।
आयोजकों के अनुसार, पावस ऋतु की साहित्यिक संवेदनाओं को गीत और ग़ज़ल के जरिए सामने लाने के साथ पौधारोपण की पहल लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देगी। कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और पर्यावरण के संगम का अवसर बनेगा।
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