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    PM मोदी बोले- नागरिक सुरक्षा का बनेगा बड़ा नेटवर्क, युवाओं की भागीदारी पर दिया जोर

    नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान लगातार 13वीं बार देशवासियों को संबोधित करते हुए देश की प्रगति, सुरक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और युवाओं के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। युवाओं के कौशल विकास से लेकर नए सेमीकंडक्टर संयंत्रों की स्थापना तक, प्रधानमंत्री द्वारा किए गए प्रमुख ऐलानों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

    नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) का विशाल नेटवर्क

    बदलती हुई वैश्विक और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से पूरी मुस्तैदी से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण को और अधिक आधुनिक बनाया जाएगा तथा इसकी क्षमताओं का विस्तार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें देश की सुरक्षा व्यवस्था में आम नागरिकों को भी आगे लाना होगा। लाल किले से यह घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि हम बहुत जल्द देश के भीतर 'सिविल डिफेंस' का एक बहुत बड़ा और मजबूत नेटवर्क खड़ा करने जा रहे हैं, जो हर आधुनिक चुनौती का डटकर सामना करेगा और इस राष्ट्रव्यापी अभियान में देश के युवाओं की सबसे बड़ी भागीदारी होगी।

    परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में कदम

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम आने वाले समय में पांच नई परमाणु भट्टियां (न्यूक्लियर रिएक्टर) शुरू करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व की गलत नीतियों के कारण देश को लंबे समय तक कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ा था। हमने अपने समुद्र तट के 99 प्रतिशत हिस्से को 'नो गो एरिया' घोषित कर रखा था, लेकिन हमारी सरकार ने ही समुद्र के भीतर जाकर खनिज अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) करने का साहसिक निर्णय लिया और उस प्रतिबंध को हटाया।

    दुर्लभ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और आधुनिक तकनीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरी ग्लोबल टेक्नोलॉजी इसी पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए 'मिशन क्रिटिकल मिनरल्स' लॉन्च किया गया है। वर्ष 2047 तक भारत 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

    एआई स्किल और युवाओं का कौशल विकास

    प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नौजवानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि आगामी एक वर्ष के भीतर देश के एक करोड़ से अधिक युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विशेष कौशल (एआई स्किल) प्रदान किया जाएगा। इससे हमारे युवा भविष्य की तकनीकी दुनिया में केवल भागीदार नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने का पूरा सामर्थ्य रखेंगे।

    मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क

    शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज प्राइवेट कोचिंग क्लासेज का जो भारी दबाव बढ़ रहा है, उससे हर अभिभावक को यह चिंता सताती है कि यदि बच्चे को कोचिंग नहीं भेजी तो उसका भविष्य कैसे बनेगा। इसी मानसिक दबाव को खत्म करने के लिए सरकार ने छात्रों के लिए 'फ्री ऑनलाइन कोचिंग' शुरू करने का बड़ा निर्णय लिया है। हम देश के युवाओं को मुफ्त कोचिंग प्रदान करने के लिए एक व्यापक डिजिटल नेटवर्क स्थापित करने जा रहे हैं।

    खेल प्रतिभा खोज अभियान (टैलेंट हंट)

    आज भारत खेल जगत में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना रहा है। टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS), खेलो इंडिया गेम्स और खेल चिकित्सा जैसी पहलों से युवाओं के लिए नए अवसर बने हैं। भारत वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है और 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) का आयोजन भी भारत करने वाला है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ओलंपिक में लगभग 40 खेल और 350 स्पर्धाएं होती हैं, जिनमें से दो-तिहाई खेलों में भारत की सीधी मौजूदगी नहीं होती। लेकिन हम इस चुनौती को स्वीकार करते हुए उन खेलों में भी आगे बढ़ेंगे। देश के 5 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में छिपी खेल प्रतिभा को तलाशने के लिए गांव-गांव और स्कूल-स्कूल स्तर पर एक व्यापक 'प्रतिभा खोज अभियान' (टैलेंट हंट) चलाया जाएगा, जिसके बाद चयनित युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    सेमीकंडक्टर उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

    आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अब अन्य राष्ट्रों पर निर्भर रहकर अपना जीवन नहीं चलाना चाहिए। आजादी के बाद से दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की तकनीक पर चर्चाएं तो बहुत हुईं, लेकिन पूर्व में कोई भी ठोस सेमीकंडक्टर संयंत्र आगे नहीं बढ़ाया जा सका। आज के डिजिटल युग में हर छोटे-बड़े उपकरण के लिए चिप (सेमीकंडक्टर) होना अनिवार्य हो चुका है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए आज भारत में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं, और आगामी 7-8 वर्षों के भीतर देश में पांच और नए सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने जा रहे हैं।

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