नई दिल्ली: गत 22 अप्रैल 2025 को हुए दर्दनाक पहलगाम आतंकवादी हमले और उसके करारे जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कई महत्वपूर्ण और अंदरूनी खुलासे किए हैं।
एक विशेष डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' में दिए गए अपने साक्षात्कार के दौरान, एनएसए अजीत डोभाल ने बताया कि पहलगाम हमले की खबर मिलते ही सऊदी अरब का अपना आधिकारिक दौरा बीच में ही छोड़कर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत लौटे, तो उन्होंने हवाई अड्डे पर उतरते ही सबसे पहला सवाल यह पूछा था— "यह किसने किया है? इस कायराना हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है? मुझे इसकी सटीक जानकारी तुरंत चाहिए।"
दुनिया के लिए भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट
अजीत डोभाल ने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से दुनिया भर के लिए यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि भारत की शालीनता, उदारता या सहिष्णुता को कभी भी उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर भारत बड़े से बड़ा जोखिम उठाने का माद्दा रखता है और परिणामों की परवाह किए बिना दुश्मन पर कड़ा प्रहार करने से पीछे नहीं हटेगा।
बता दें कि पिछले वर्ष 'ऑपरेशन सिंदूर' के सफल समापन के बाद दिए गए इस इंटरव्यू में एनएसए डोभाल ने उन रणनीतिक निर्णयों का विवरण साझा किया है, जिन्होंने भारत की इस ऐतिहासिक सैन्य प्रतिक्रिया को दिशा और मजबूती दी।
'ऑपरेशन सिंदूर' की योजना और कड़ा संदेश
ऑपरेशन की रूपरेखा और उसके क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए डोभाल ने बताया कि भारत ने यह स्पष्ट निर्णय लिया था कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के भीतर उन تمام आतंकी ठिकानों और लॉन्च पैड्स को नेस्तनाबूद करना था, जिनका सीधा संबंध पहलगाम हमले से था।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत यह चाहता है कि पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना यह अच्छी तरह समझ ले कि आतंकवाद को उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन देना अथवा आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने में उनकी नाकामी अब भारत के लिए पूरी तरह असहनीय हो चुकी है।
88 घंटे तक चला संघर्ष और 10 मई को हुआ सीजफायर
पहलगाम हमले के बाद भारत की कड़ी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने जब भारतीय ठिकानों पर हमले करने की कोशिश की, तो भारतीय सशस्त्र बलों ने भी उसका बेहद आक्रामक और मुंहतोड़ जवाब दिया। यह पूरी सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत ही अंजाम दी गई। परमाणु हथियारों से लैस इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह सैन्य संघर्ष लगभग 88 घंटों तक लगातार जारी रहा, जो अंततः 10 मई की शाम को दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से हुए समझौते के बाद थमा।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दृढ़ता के साथ कहा, "एक बार जब राष्ट्र की सुरक्षा के लिए कुछ शुरू हो जाता है, तो देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए जितनी दूर तक जाना जरूरी होगा, हम जाने को तैयार हैं और इसकी कोई सीमा नहीं है। हम अपने देश के लिए खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे।"
'ऑपरेशन सिंदूर' अभी खत्म नहीं हुआ
एनएसए ने स्पष्ट किया कि जब प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी भी जारी है, तो इसके पीछे का स्पष्ट संदेश यह है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह निर्णायक लड़ाई तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक कि धरती से आखिरी आतंकवादी का भी सफाया नहीं कर दिया जाता।
गौरतलब है कि यह ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सिंदूर' पिछले साल 7 मई की सुबह को शुरू किया गया था। यह अभियान 22 अप्रैल को हुए उस खौफनाक पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में चलाया गया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके के अंदर कई किलोमीटर अंदर तक घुसकर सटीक एयरस्ट्राइक और हमलों के जरिए आतंकी ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।


