जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक घोषणा कर दी है। राजधानी जयपुर में बुलाई गई एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की गई, जिसके साथ ही पूरे ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आचार संहिता लगते ही सरकारी तबादलों और नई नीतिगत घोषणाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अदालती आदेशों को ध्यान में रखते हुए आयोग को अपनी पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 नवंबर से पहले हर हाल में पूरी करनी है।
चार चरणों में होगा मतदान और आचार संहिता लागू
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार राजस्थान में पंचायत चुनाव कुल चार चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक पाबंदियां शुरू हो गई हैं। मंत्रियों के सरकारी वाहनों, सरकारी गेस्ट हाउस और डाक बंगलों के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। आयोग के इस कदम से प्रशासनिक अमला और राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इस बार के चुनावों में करीब 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करके ग्रामीण सरकार की नुमाइंदगी तय करेंगे।
चुनाव का विस्तृत गणित और पदों का स्वरूप
इस त्रि-स्तरीय पंचायती राज चुनाव में विभिन्न स्तरों पर होने वाले मुकाबलों और प्रतिनिधियों की संख्या का पूरा ब्योरा सामने आ चुका है। चुनाव प्रक्रिया के तहत इस बार कुल 1.69 लाख से अधिक जनप्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा।
प्रतिनिधियों की कुल संख्या: राज्य में कुल 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियाँ और 14,403 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनके जरिए 41 जिला प्रमुख, 1,403 जिला परिषद सदस्य, 457 प्रधान, 8,245 पंचायत समिति सदस्य, 14,403 सरपंच और 1,30,589 वार्ड पंच चुने जाएंगे।
मतदान की पद्धति: ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बिना किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक सिंबल के पारंपरिक मतपत्र के जरिए कराए जाएंगे। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव दलीय आधार पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के माध्यम से संपन्न होंगे।
आरक्षण का दायरा: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सख्ती से लागू किया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी नियमानुसार सीटें आरक्षित की गई हैं।
राजनीतिक सरगर्मी और दलों की तैयारियाँ
नगरीय निकाय चुनावों के ठीक बाद आ रहे इन पंचायती राज चुनावों को सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक ताकत मापने का एक बड़ा जरिया माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों की सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा कई क्षेत्रीय व राष्ट्रीय दल भी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद अब गाँवों में राजनीतिक बैठकों, चुनावी चर्चाओं और जोड़-तोड़ का दौर तेजी से परवान चढ़ने लगा है।


