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    निर्वाणवन में सृजक ने किया वृक्षारोपण और पावस गीत-गजल गोष्ठी का आयोजन, 21 फलदार व औषधीय पौधे लगाए

    डढ़ीकर स्थित निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर में साहित्य और पर्यावरण का संगम, कवियों ने सावन, देशभक्ति और प्रकृति प्रेम की रचनाओं से बांधा समां

    अलवर। साहित्यिक-सामाजिक संस्था ‘सृजक’ की ओर से डढ़ीकर स्थित निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर में रविवार को सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 10 बजे हुए कार्यक्रम में फलदार एवं औषधीय गुणों वाले 21 पौधे लगाए गए। इनमें लीची, जामुन, अर्जुन, पीपल और नीम प्रमुख रहे।

    निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर
    निर्वाणवन फाउंडेशन परिसर

    सृजक संस्थान के सचिव रामचरण ‘राग’ ने बताया कि वृक्षारोपण के साथ संस्था की नियमित मासिक कवि गोष्ठी को इस बार ‘पावस गीत-गजल गोष्ठी’ के रूप में आयोजित किया गया। आयोजन में साहित्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ दिया गया।

    सावन के गीतों से सजी गोष्ठी

    सृजक की ‘पावस गीत-गजल गोष्ठी’ संस्थान के अध्यक्ष सरदार अमरीक सिंह ‘अदब’ की अध्यक्षता में हुई। निर्वाणवन फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी निर्वाण बोधिसत्व मुख्य अतिथि रहे। वरिष्ठ कवि रघुवर दयाल जैन, प्रदीप भारद्वाज और देवेंद्र शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    सुबह 11 बजे शुरू हुई गोष्ठी का शुभारंभ रेणु मिश्रा की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद कवियों ने सावन, विरह, प्रकृति, देशभक्ति और प्रेम पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं।

    युवा कवि देवांश जांगिड़, डॉ. मयंक गर्ग, डॉ. देवेंद्र शर्मा, गिरवर सिंह बांकेावत, पुरुषोत्तम शर्मा, रेणु मिश्रा, दया गर्ग, खेमेंद्र सिंह चंद्रावत, हेमराज सैनी, डॉ. वेद प्रकाश यादव ‘सहज’, राजेंद्र शर्मा और प्रदीप माथुर सहित अन्य रचनाकारों ने सावन और विरह भाव से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

    देशभक्ति और प्रेम की रचनाओं ने बांधा समां

    रवींद्र मिश्रा, अंजू नकड़ा और घनश्याम शर्मा ने देशभक्ति की रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। प्रदीप भारद्वाज, रामचरण ‘राग’ और अमरीक सिंह ‘अदब’ की गजलों को भी खूब सराहना मिली।

    प्रेम शर्मा की प्रेम कविता और डॉ. शिवचरण चैड़वाल की गजल ने गोष्ठी की साहित्यिक गरिमा बढ़ाई। गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ के प्रेरक गीत तथा रघुवर दयाल जैन की हास्य कविता ने भी श्रोताओं को प्रभावित किया।

    जगदीश भारद्वाज और सदाराम चौमूं की प्रकृति प्रेम से जुड़ी रचनाओं में पेड़ों के महत्व को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। ख्यात बांसुरी वादक सुभाष नकड़ा ने मां को समर्पित गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया।

    मनुष्यता के लिए काम करने की प्रेरणा

    मुख्य अतिथि स्वामी निर्वाण बोधिसत्व ने सृजक संस्थान की गतिविधियों और सक्रियता की सराहना की। उन्होंने संस्था के सामाजिक एवं साहित्यिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए मनुष्यता के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी।

    कार्यक्रम में सृजक संस्थान के संरक्षक भरत सिंह अहरोदिया, शिक्षाविद प्रदीप सैनी, हरिनारायण, मुकेश मीणा, नीलू जौनवाल, रंगकर्मी महेंद्र सिंह, निर्वाणवन की कार्यकर्ता निकिता, हवा सिंह, मोहम्मद अजीज, सुंदर सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के आरंभ में उपाध्यक्ष खेमेंद्र सिंह चंद्रावत ने स्वागत किया। रेणु मिश्रा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन सृजक संस्थान के सचिव रामचरण ‘राग’ ने किया।

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