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    स्कूलों की बदहाली छिपाने के लिए सेंसरशिप लगा रही भाजपा सरकार: टीकाराम जूली

    जर्जर भवन और मूलभूत सुविधाएं सुधारने के बजाय मीडिया व बच्चों की आवाज दबाने का आरोप, बोले—स्कूलों पर सरकार अपनी नाकामी छिपा रही

    जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत, मूलभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली सुधारने के बजाय विद्यालयों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाकर अपनी नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।

    जूली ने कहा कि प्रदेश में लगातार बदहाल होती शिक्षा व्यवस्था, जर्जर स्कूल भवनों और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन सरकार इनका समाधान करने के बजाय अपनी आवाज उठाने वाले बच्चों और सच्चाई सामने लाने वाले मीडिया से लड़ रही है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में व्याप्त डर का आलम यह है कि अपनी कमियों को उजागर होने से रोकने के लिए तानाशाहीपूर्ण और जनविरोधी फैसले लागू किए जा रहे हैं।

    मीडिया पर रोक से सच्चाई नहीं छिपेगी: जूली

    टीकाराम जूली ने कहा कि हाल ही में जेन-अल्फा विवाद के दौरान 4-5 स्कूलों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार बुरी तरह घबरा गई है। उनके अनुसार इसी डर के चलते स्कूलों में मोबाइल के इस्तेमाल और मीडिया के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को सबसे बड़ा डर मीडिया से है, क्योंकि यदि मीडिया स्कूल परिसरों में जाएगी तो वहां की वास्तविक स्थिति प्रदेश के सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस और मीडिया पर इस तरह की रोक लगाकर भाजपा सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामी और कथित तानाशाहीपूर्ण रवैये को छिपाने का प्रयास कर रही है।

    हाई कोर्ट की फटकार और 85 हजार खराब कमरों का मुद्दा उठाया

    जूली ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर न्यायालय में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने भी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और सरकार को अदालत में माफी मांगनी पड़ी है।

    उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। जूली के अनुसार प्रदेश में करीब 85 हजार स्कूलों के कमरे खराब स्थिति में हैं, जबकि लगभग 3,768 स्कूल भवन जर्जर घोषित किए जा चुके हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद सरकार नए भवनों और अतिरिक्त कक्षा-कक्षों के निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है। जूली ने कहा कि यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करती है।

    बच्चों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगें पूरी करे सरकार

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब स्कूली बच्चों ने अपने अधिकारों और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए आवाज उठानी शुरू की तो सरकार उस आवाज को दबाने में जुट गई। उन्होंने कहा कि छात्र कोई असंभव मांग नहीं कर रहे हैं।

    जूली के मुताबिक बच्चे सिर्फ सुरक्षित कक्षा-कक्ष, स्वच्छ पेयजल, बैठने की उचित व्यवस्था और पर्याप्त शिक्षकों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये बच्चों की बुनियादी जरूरतें हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें स्कूलों में सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि सरकार को बच्चों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और स्कूलों की वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

    शिक्षा व्यवस्था सुधारने की बजाय प्रतिबंध क्यों?

    टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि यदि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बेहतर है तो स्कूल परिसरों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने से सरकार को डर क्यों लग रहा है।

    उन्होंने कहा कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर भवनों की समस्या को प्रतिबंध लगाकर खत्म नहीं किया जा सकता। सरकार को पारदर्शिता के साथ स्कूलों की स्थिति सामने रखनी चाहिए और कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनानी चाहिए।

    जूली ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित स्कूल और बेहतर शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि सच्चाई दिखाने वाले मीडिया और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों को रोकना समस्या का समाधान नहीं है।

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