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    पर्यूषण पर्व पर दो दिन मांस की दुकानें बंद रखने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    जैन समाज के धार्मिक पर्यूषण पर्व पर अहिंसा दिवस घोषित करने की मांग, पूरे राजस्थान में आदेश लागू कराने की अपील

    अलवर। जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख धार्मिक पर्व पर्यूषण और दस लक्षण पर्व के अवसर पर राजस्थान में दो दिन मांस-मछली, अंडे की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने की मांग उठी है। राजस्थान के पूर्व निशक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आगामी 15 सितंबर और 25 सितंबर को पूरे प्रदेश में मांसाहार से संबंधित दुकानों एवं पशुवध केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी करने की मांग की है।

    खिल्लीमल जैन ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि जैन धर्मावलंबियों के लिए सितंबर माह में आने वाले पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन 15 सितंबर को संवत्सरी पर्व तथा दस लक्षण पर्व के अंतिम दिन 25 सितंबर का विशेष धार्मिक महत्व है। इन दोनों दिनों में जैन समाज के लोग व्रत, तपस्या, संयम और आत्मशुद्धि की साधना करते हैं।

    उन्होंने कहा कि जैन धर्म की मूल भावना अहिंसा और जीव दया पर आधारित है। ऐसे में इन धार्मिक अवसरों पर किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मूक प्राणियों के वध के साथ-साथ मांस और मछली की बिक्री तथा होटलों में इनकी परोसगी पर भी रोक लगाने की मांग की।

    दोनों दिनों को अहिंसा दिवस का दर्जा देने की मांग

    पूर्व निशक्तजन आयुक्त ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 15 सितंबर और 25 सितंबर को अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन दोनों दिनों में जैन समाज संयम, त्याग, तपस्या और जीवों के प्रति करुणा की भावना के साथ धार्मिक आराधना करता है। ऐसे में सरकार की ओर से भी अहिंसा की भावना को बढ़ावा देने वाला निर्णय लिया जाना चाहिए।

    उन्होंने मांग की कि अलवर सहित पूरे राजस्थान में इन दोनों दिनों के लिए मीट-मांस, मछली, अंडे की दुकानें, बूचड़खाने एवं पशुवध केंद्र बंद रखने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।

    नगर निकायों को जिम्मेदारी सौंपने की मांग

    खिल्लीमल जैन ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की कि आदेश जारी होने के बाद उसकी प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की सभी नगर निकायों के संबंधित आयुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी धरातल पर प्रभावी क्रियान्विति भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    उन्होंने प्रशासन से यह व्यवस्था करने की मांग की कि इन दोनों दिनों में प्रतिबंधित गतिविधियों पर निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।

    अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने की मांग

    पूर्व निशक्तजन आयुक्त ने अपने पत्र में संबंधित नगर निकाय आयुक्तों तथा आदेश की पालना कराने वाली टीम के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने की मांग भी की है।

    उन्होंने कहा कि यदि प्रतिबंध के बावजूद कहीं मांस-मछली, अंडे की दुकान या पशुवध केंद्र खुला मिलता है तो आमजन तत्काल संबंधित अधिकारी को इसकी सूचना दे सके। इससे प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और आदेश की प्रभावी पालना सुनिश्चित की जा सकेगी।

    खिल्लीमल जैन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जैन समाज की धार्मिक भावनाओं और अहिंसा के संदेश को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में तत्काल राज्यव्यापी आदेश जारी किए जाएं तथा 15 सितंबर एवं 25 सितंबर को प्रभावी रूप से मांसाहार संबंधी गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित कराई जाए।

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