केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 1937 में तुष्टिकरण की राजनीति और वोट बैंक के दबाव में आकर कांग्रेस ने मोहम्मद अली जिन्ना के इशारे पर 'वंदे मातरम' के मूल स्वरूप से समझौता किया था। इसके अलावा उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बयानों व कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
1937 में जिन्ना के दबाव में बदला गया स्वरूप
'वंदे मातरम' के इतिहास का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो लोग सो रहे हैं उन्हें जगाया जा सकता है, लेकिन जो लोग जान-बूझकर सोने का नाटक कर रहे हैं, उन्हें कभी नहीं जगाया जा सकता। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि 1937 में वोट बैंक की राजनीति के चलते जिन्ना के दबाव में 'वंदे मातरम' के मूल स्वरूप में बदलाव किया गया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें कहा गया है कि 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद गाए जाने चाहिए, क्योंकि सनातन के बिना भारत की पहचान अधूरी है।
राहुल गांधी और विदेश दौरों पर निशाना
राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि वे देश में अराजकता फैलाने और बच्चों के मन में नकारात्मकता भरने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में राहुल गांधी की तरफ से कोई भी सकारात्मक बयान सामने नहीं आया है और वे गहरी निराशा में डूबे हुए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च और उसके स्रोतों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है।
सोनिया गांधी की आत्मकथा और नागरिकता पर सवाल
सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा का जिक्र करते हुए गिरिराज सिंह ने सवाल उठाया कि उन्होंने शादी के पूरे 15 साल बाद भारतीय नागरिकता क्यों ली थी। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार शादी के बाद कोई भी महिला तन, मन और धन से परिवार का हिस्सा बन जाती है, ऐसे में नागरिकता लेने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई, यह संदेह पैदा करता है।
स्थानीय भाषा के मुद्दे पर बयान
महाराष्ट्र में स्थानीय भाषा (मराठी) को लेकर चल रहे विवाद पर बात करते हुए गिरिराज सिंह ने उन लोगों का समर्थन किया जो वहां रहकर स्थानीय भाषा सीख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लोगों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त और अतिरिक्त समय मिलना चाहिए ताकि किसी को भी असुविधा न हो।


