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    पेड़-पौधों को बनाया डिजिटल, 500 पौधों पर लगाए QR कोड; शिक्षक को राष्ट्रपति सम्मान

    भवानीमंडी: भवानीमंडी के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के जीव विज्ञान व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन का चयन प्रतिष्ठित राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान के लिए किया गया है। पूरे देश से चयनित कुल 48 शिक्षकों की इस सूची में राजस्थान से स्थान पाने वाले वे इकलौते दूसरे शिक्षक हैं, जबकि झालावाड़ जिले से इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने जाने वाले वे पहले शिक्षक बन गए हैं। देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आगामी 5 सितंबर को नई दिल्ली में उन्हें इस गौरवशाली पुरस्कार से सम्मानित करेंगी।

    तकनीक और पर्यावरण का अनूठा समन्वय

    डॉ. सेन ने अपने विद्यालय को एक आधुनिक डिजिटल प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने के साथ-साथ शिक्षा को तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के साथ बहुत ही खूबसूरती से जोड़ा है। उनके इन अनूठे नवाचारों ने न केवल विद्यार्थियों के मन में विज्ञान के प्रति गहरी रुचि जगाई है, बल्कि स्कूल की राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान भी कायम की है।

    QR कोड से 500 पेड़-पौधों की डिजिटल निगरानी

    विद्यालय परिसर में छात्रों की उपस्थिति और नामांकन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से डॉ. सेन ने लगभग 500 पेड़-पौधों पर विशेष QR कोड चस्पा किए हैं। किसी भी स्मार्टफोन से इन QR कोड को स्कैन करते ही उस पौधे का वैज्ञानिक नाम, उसका पारिस्थितिक महत्व और दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाती है। ग्रामीण छात्रों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए पौधों से जुड़ी यह तमाम जानकारी हाड़ौती और मालवी क्षेत्रीय भाषाओं में ऑडियो संदेशों के रूप में भी रिकॉर्ड करके जोड़ी गई है। इस बेहतरीन पहल की शुरुआत करीब दो साल पहले विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा के सक्रिय सहयोग से की गई थी, जिसे तत्कालीन जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी एक पौधे के लिए अपनी आवाज में ऑडियो संदेश रिकॉर्ड कर भरपूर समर्थन दिया था।

    विद्यार्थियों ने खोजे 12 दुर्लभ क्षुद्रग्रह

    डॉ. दिव्येंदु सेन के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणा से विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं। उनके दो मेधावी छात्रों, श्रेयांस और आरुष आस्तोलिया ने मिलकर अंतरिक्ष में 12 दुर्लभ क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉयड) की खोज करने में बड़ी कामयाबी पाई है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद दोनों विद्यार्थियों को नासा की वरिष्ठ वैज्ञानिक और जेट प्रोपल्शन लैब की डिप्टी डायरेक्टर रोजली लोपेज के साथ सीधे ऑनलाइन संवाद करने का दुर्लभ अवसर मिला। इस दौरान बच्चों ने अंतरिक्ष विज्ञान, रिंग ऑफ फायर और बृहस्पति ग्रह के ज्वालामुखियों जैसे जटिल विषयों पर कई सवाल पूछे, जिनके वैज्ञानिकों ने बेहद उत्साहवर्धन जवाब दिए।

    कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

    शिक्षा के क्षेत्र में सूचना तकनीक के शानदार उपयोग के लिए डॉ. सेन को पहले भी कई राष्ट्रीय एवं प्रांतीय सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने अपनी योग्यता का परिचय देते हुए गूगल एजुकेटर लेवल-1 की कठिन परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की थी। इसके अलावा उन्हें हाड़ौती गौरव शिक्षक सम्मान, रिलायंस फाउंडेशन बेस्ट टीचर अवॉर्ड और प्रतिष्ठित पर्यावरण पद्म पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान के लिए उनका यह चयन शिक्षण जगत में उनके नवाचारों और पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की एक बड़ी दास्तान है।

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