नई दिल्ली। कनाडा और मलेशिया से तीन भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण भारत के सुरक्षा ढाँचे और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के आपसी तालमेल की एक बड़ी सफलता है। देश के गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, पंजाब पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की मदद से इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मलेशिया से डिपोर्ट कर भारत लाए गए देविंदर बंबीहा गैंग के तीनों प्रमुख गुर्गों को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें पंजाब पुलिस की कस्टडी में सौंप दिया गया है। वर्ष 2026 में अब तक भारतीय एजेंसियां 'सुरक्षित भारत' अभियान के तहत 51 खतरनाक अपराधियों को विदेशों से वापस लाने में सफल रही हैं।
तीनों आरोपियों की पहचान और पुलिस की कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल (निवासी फरीदकोट, पंजाब) तथा अजय सिंह और पवनदीप सिंह (दोनों निवासी श्रीगंगानगर, राजस्थान) के रूप में हुई है। पंजाब पुलिस के मुताबिक ये तीनों आरोपी मलेशिया से बंबीहा गैंग का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। ये तीनों हत्या, अवैध रंगदारी, विस्फोटकों की तस्करी और लुधियाना में ग्रेनेड हमले की साजिश रचने जैसे कई संगीन मामलों में वांछित थे।
जसप्रीत सिंह पर गंभीर मामले दर्ज
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी जसप्रीत सिंह वर्ष 2019 में मलेशिया भाग गया था और वहां जाकर बंबीहा गैंग के शीर्ष भगोड़ों के सीधे संपर्क में आया। जसप्रीत पर वर्ष 2025 में हुए यादविंदर सिंह हत्याकांड और पूर्व छात्र नेता जीवंजोत सिंह चहल उर्फ जुगनू के चालक की हत्या में मुख्य साजिशकर्ता होने का गंभीर आरोप है। पुलिस अब उससे विदेश से गिरोह को मिलने वाली फंडिंग के बारे में पूछताछ करेगी।
लुधियाना ग्रेनेड हमले की साजिश से संबंध
अन्य दो आरोपियों, अजय सिंह और पवनदीप सिंह पर वर्ष 2025 में लुधियाना में ग्रेनेड हमला करवाने की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने समय रहते इस हमले की योजना को नाकाम कर दिया था और अक्टूबर 2025 में इनके दो स्थानीय सहयोगियों के पास से चीनी निर्मित P-86 हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से कनेक्शन
पंजाब पुलिस की प्राथमिक जांच में इन तीनों आरोपियों के तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रत्यर्पण कई महीनों की डिजिटल सर्विलांस और खुफिया ट्रैकिंग का नतीजा है। अब सुरक्षा एजेंसियां तीनों आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और भारत में मौजूद उनके मददगारों का पता लगाने में जुटी हैं।


