More
    Homeराजस्थानजयपुरएक्सप्रेसवे विवाद पर किसान आर-पार के मूड में, 2 सितंबर को 1000...

    एक्सप्रेसवे विवाद पर किसान आर-पार के मूड में, 2 सितंबर को 1000 ट्रैक्टरों से जयपुर कूच

    कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में विधानसभा घेराव का ऐलान, वार्ता के तीसरे दौर में भी नहीं बनी सहमति

    जयपुर। कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान महापंचायत ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। सरकार और किसानों के बीच वार्ता के तीसरे चरण के क्रम में बुधवार को जयपुर कलक्ट्री सभागार में एक्सप्रेसवे निर्माण कंपनी की ओर से प्रजेंटेशन दिया गया, लेकिन किसान प्रतिनिधि इससे संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद किसान महापंचायत ने 2 सितंबर को एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच कर विधानसभा घेराव करने की घोषणा की।

    बैठक में सरकार की ओर से जयपुर जिला कलक्टर संदेश नायक, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी और सड़क निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। निर्माण कंपनी ने एक्सप्रेसवे को लेकर प्रजेंटेशन प्रस्तुत करते हुए किसानों से सहमति बनाने का प्रयास किया, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने एक्सप्रेसवे से होने वाले संभावित नुकसान को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं।

    45 हजार से ज्यादा परिवार प्रभावित होने का दावा

    किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि करीब 209.5 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे से बड़ी संख्या में किसान परिवार प्रभावित होंगे। किसान महापंचायत का दावा है कि परियोजना से करीब 45,174 परिवारों के लगभग ढाई लाख किसान प्रभावित होंगे।

    किसानों ने सरकार द्वारा तैयार सामाजिक समाघात प्रतिवेदन का हवाला देते हुए कहा कि सीकर, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़ और अजमेर जिलों में लगभग 33,032 पेड़ों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। वहीं किसानों के अनुसार करीब 3,641 हेक्टेयर यानी 14,564 बीघा भूमि के अधिग्रहण की स्थिति बनेगी।

    किसान प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में परिवारों की जमीन प्रभावित होने के बावजूद सरकार किसानों की चिंताओं का स्थायी समाधान किए बिना परियोजना को आगे क्यों बढ़ा रही है।

    ‘किसान जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे’

    किसान महापंचायत ने एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। किसान नेताओं का कहना है कि इस परियोजना की मांग किसानों ने नहीं की थी, इसके बावजूद सरकार द्वारा इसे क्षेत्र की जरूरत बताकर आगे बढ़ाया जा रहा है।

    किसान महापंचायत ने दो टूक कहा कि “किसान जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे।” किसान प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे का लाभ मुट्ठी भर उद्योगपतियों को पहुंचाने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जबकि प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की जमीन बचाने के आरोप भी लगाए गए।

    तीसरी वार्ता के बाद आंदोलन का ऐलान

    किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष गोपीराम डबास, प्रदेश मंत्री बत्ती लाल बैरवा, ज्ञानचंद मीणा, महेश जाखड़, युवा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी सहित विभिन्न जिलों और तहसीलों के पदाधिकारी शामिल रहे।

    बैठक के बाद किसान नेताओं ने आगामी 2 सितंबर को जयपुर में ट्रैक्टर रैली निकालने की घोषणा की। आंदोलन में सीकर, अजमेर, जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के किसानों के शामिल होने की बात कही गई है।

    किसान नेताओं ने कहा कि एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किसान राजधानी पहुंचेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

    सड़क पर संघर्ष और सरकार से संवाद साथ-साथ

    किसान महापंचायत ने कहा कि किसानों का आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार से संवाद भी जारी रखा जाएगा। किसानों ने कहा कि वे सड़क पर संघर्ष के साथ-साथ सरकार के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखेंगे।

    किसान नेताओं ने सरकार से मांग की कि किसानों की जमीन और आजीविका से जुड़े सवालों को गंभीरता से लेते हुए एक्सप्रेसवे को निरस्त करने का आदेश जारी किया जाए। किसान महापंचायत ने कहा कि अब निर्णय सरकार के हाथ में है और वह किसानों के न्यायपूर्ण आग्रह को स्वीकार कर आगे की कार्रवाई करे।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here