जो बुढ़ापे में माता -पिता को कष्ट देते है वह कभी सुख से नहीं रह पाते है
भीलवाड़ा। जिंदगी सबका प्यार नजर आता है पर पिता वह होता है जिसका प्यार नजर नहीं आता पर वह अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देता है। खुद दुःख सहकर बच्चों को खुशियां देने वाला पिता होता है। पिता हमेशा संतान की खुशी व तरक्की की कामना करता है। अपना जीवन ऐसा बनाओ कि घर के बाहर आपके पिता से लोग पूछे कि आपने पिछले जन्म में कौनसे पुण्य किए जो ऐसी संतान मिली। आपके कारण आपके पिता को कभी अपमान नहीं मिलें। दुनिया में आपकी पहचान आपके मां-बाप से होती है। जिस पिता के नाम से जिंदगी मिली उस का नाम कभी बदनाम मत होने देना।
ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में शनिवार को जीवन में पिता के महत्व पर प्रवचन में व्यक्त किए। स्वाधीनता दिवस से प्रारंभ ज्ञान गंगा महोत्सव का समापन रविवार को होगा।
आचार्यश्री ने कहा कि पिता अपने अरमानों को काट कर संतान की इच्छाएं पूरी करता है। बेटी के लिए मायका मां से नहीं पिता से होता है। पिता जाने पर आधा पीहर खत्म हो जाता है ओर मां लाचार हो जाती है। पिता अपनी सारी ताकत लगा बेटे की जिंदगी को संवारता है। अपने उस पिता की कद्र करे जिसने दुनिया में तुम्हे जायज होने का हक दिया है। एक बेटा दुनिया में केवल पिता से ही जिद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि हर पिता के अंदर एक भगवान मौजूद हुआ करता है। पिता की डांट फटकार बुरी लगती है लेकिन वह दुनिया की बीमारियों से बचाती है। उनकी छत्रछाया में ही परिवार को सुरक्षा मिली करती है। पिता बेटे को अंगुली पकड़ चलना सिखाता है ओर उसके खातिर पूरी दुनिया से दुश्मन मोल लेने को तैयार हो जाता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बुढ़ापा दो तरह से जिंदगी में आता है। एक उम्र के साथ आता ओर दूसरा जब बच्चे उपेक्षा करते है तो जवानी में भी बुढ़ापे का अहसास होने लगता है। ओलाद की मार पड़ती है तो बुढ़ापे में जंग लगती है। संतान अनदेखी ओर उपेक्षा करे इससे बड़ी पीड़ा नहीं हो सकती। अपने ही घर में लाचार होकर जीना एक बाप के लिए बहुत कठिन होता है। उन्होंने कहा कि जो संतान बुढ़ापे में अपने मां-बाप को कष्ट देती है वह कभी सुखी नहीं रह पाती है। जीने के लिए केवल भोजन पानी ही नहीं प्रेम व संवेदना की भी जरूरत होती है। अपने मां-बाप को कभी जिंदगी बोझ मत महसूस होेने दो।
कोई पिता नहीं चाहता उसके कारण बेटे का घर उजड़ जाए पर याद रहे कर्म हमेशा लौटकर आते है। जैसा हम अपने मां-बाप के साथ करेंगे वैसा ही कल हमारी संतान हमारे साथ करने वाली है। जब तक मां-बाप की नजर में सम्मान नहीं है तब तक आपके लिए दुनिया के सारे सम्मान फीके है। माता-पिता के मरने के बाद आंसू बहाने की बजाय जीते जी उनका सम्मान करना चाहिए।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमचंद,राजेन्द्र, राकेश सेठी परिवार एवं पुष्पलता, संदीप, नम्र जैन परिवार ने प्राप्त किया। लॉयन्स क्लब भीलवाड़ा के सदस्यों ने गर्वनर निशांत जैन के नेतृत्व में एवं तेरापंथ समाज के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया। अनंत पाटनी ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे थे।
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