दूसरों को मत बदलो, खुद को बदल डालो दुनिया बदली हुई दिखेगी
भीलवाड़ा। दुनिया के सारे शास्त्र पढ़ लिए पर आत्मपाठ नहीं पढ़ा, आत्मधर्म नहीं जाना तो तो सारे धर्म पर पानी फिर जाएगा। जिन्होंने राम धर्म व नाम धर्म आत्मसात कर लिया ये लोक व परलोक सुधर जाएंगे। सकल समस्याओं का समाधान करने वाला ओर सर्व सुख प्रदान करने वाला राम धर्म है। राम धर्म ही आत्म धर्म होता है। आत्मधर्म के मार्ग पर आरूढ़ होने पर राम धर्म व नाम धर्म का प्रभाव जीवन बदल देता है।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शनिवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नाम धर्म के प्रभाव से अनन्य भाव पैदा होकर जीवन अलोकिक बन जाता है। चार वेदों को पढ़ना आसान लेकिन किसी के मन को पढ़ना कठिन होता है। किसी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र के मन की वेदना को पढ़ना बहुत दुर्लभ व विलक्षण कार्य होता है। राष्ट्र धर्म, राम धर्म ओर नाम धर्म का प्रताप इतिहास बदल देता है।
आचार्यश्री ने कहा कि नाम प्रवृतियां, दृष्टि एवं सृष्टि को बदल देता है। नामानुरागी में बदले की भावना नहीं होती वह खुद को बदलने की भावना रखता है। असली साधक वहीं होता है जो खुद को बदलता है। खुद को बदल डालो दुनिया बदली हुई दिखेगी। जैसी हमारी दृष्टि होगी वैसी ही सृष्टि दिखेगी। उन्होंने कहा कि भजन करने से व्यवहार,आहार ओर सारा जीवन बदल जाता है। इससे जीवन जीने की दृष्टि प्राप्त होती है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जो धारण किया जा सके वहीं धर्म होता है। क्रोध की ज्वाला प्रदर्शित करने वाला कार्य कभी धर्म नहीं हो सकता। अहिंसा परमो धर्म का परिधान धर्म की विलक्षणता को दर्शाता है। संतोष रूपी परिधान ग्रहण करने पर सुख शांति की प्राप्ति होती है। राम धर्म संतोष परिधान प्रदान करता है। इसके भीतर धर्म समाहित होने से इससे बढ़कर संसार में कोई धर्म नहीं हो सकता। राम धर्म जीवन में आए बिना मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि धन बहुत कुछ है पर धर्म सब कुछ है। धन से चश्मे की गोल्डन फ्रेम बनाई जा सकती पर दिव्य चक्षु की प्राप्ति धर्म से ही होती है। धन से अच्छा गद्दा खरीद सकते पर नींद को नहीं खरीद सकते। धन से कभी शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती पर धर्म से शांति व परमानंद की प्राप्ति होती है। राम धर्म जीवन जीने का मर्म समझाता है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


