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    DEO पर कार्रवाई बेअसर! 4 बार सस्पेंड, फिर भी 4.51 करोड़ की खरीदी का मामला अटका

    बलरामपुर | जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिर गए हैं। पहले भी 2.42 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और चार बार निलंबन झेल चुके यादव पर इस बार 4.51 करोड़ रुपये की खरीदी में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगा है। कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच में कई तरह की गड़बड़ियां उजागर हुई हैं, हालांकि अभी तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

    बिना समिति और भौतिक सत्यापन के खर्च किए 4.51 करोड़

    जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को विभिन्न योजनाओं के तहत 4.57 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ था। इस राशि से छात्राओं के लिए साइकिलें, विज्ञान सामग्री, फर्नीचर, खेल उपकरण और स्टेशनरी खरीदी जानी थी। नियमों को ताक पर रखकर जिला स्तरीय क्रय समिति का गठन किए बिना ही भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, सामग्री का न तो भौतिक सत्यापन कराया गया और न ही कई सामानों का स्टॉक रजिस्टर में कोई रिकॉर्ड मिला।

    टेंडर से बचने के लिए छोटे बिल और कैशबुक में ओवरराइटिंग

    छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 का उल्लंघन करते हुए 50 हजार रुपये से अधिक की खरीदी के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं नहीं अपनाई गईं। टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए 50-50 हजार रुपये के टुकड़े-टुकड़े में बिल बनाए गए। जांच के दौरान कैशबुक में कटिंग और ओवरराइटिंग पाई गई। लगभग 42 लाख रुपये की विज्ञान किट और 11.20 लाख रुपये की स्टेशनरी का कोई ठोस स्टॉक एंट्री या चालान उपलब्ध नहीं मिला।

    साइकिल खरीदी और अन्य खर्चों पर भी उठे गंभीर सवाल

    जांच में 4,025 साइकिलों के एवज में 1.62 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान का भी खुलासा हुआ है, जिसकी कोई स्टॉक एंट्री नहीं है। इसके अलावा विभाग की बैठकों में नाश्ते के नाम पर 4 लाख रुपये और रांची की एक फर्म को परीक्षा मुद्रण सामग्री के नाम पर 17.96 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन सामग्री कार्यालय या स्टोर में मौजूद नहीं मिली।

    कलेक्टर ने मांगा जवाब, संतोषजनक न होने पर होगी कड़ी कार्रवाई

    कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत मिलने पर अपर कलेक्टर और जिला कोषालय अधिकारी से मामले की विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीईओ को शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। डीईओ ने जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिनों का समय मांगा है। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए मामला शासन को भेजा जाएगा।

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