मुंबई। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विवाद लगातार गरमाता जा रहा है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के विरोध में उतरे जाने-माने अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज को हाल ही में बेंगलुरु पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया था। हिरासत से रिहा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इस प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है और इसे नागरिकों के अधिकारों पर सीधा हमला करार देते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की है।सोशल मीडिया पर तीखा हमला, प्रक्रिया को बताया 'तख्तापलट'
प्रकाश राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए इस पूरी प्रक्रिया की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि एसआईआर एक सोची-समझी साजिश और जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा है। उन्होंने इसे देश के नागरिकों के खिलाफ बिना खून बहाए किए जा रहे तख्तापलट जैसा करार दिया और मांग की कि मतदाता सूची के इस संशोधन को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
फॉर्म की फोटोकॉपी का मामला उजागर होने पर 5 बीएलओ निलंबित
एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल तब और गहरे हो गए जब कुछ दिन पहले खारघर में एक फोटोकॉपी की दुकान पर 3,404 भरे हुए आधिकारिक एसआईआर फॉर्म की प्रतियां निकालते हुए एक राजनीतिक कार्यकर्ता को पकड़ा गया। गोपनीय और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनाधिकृत हाथों में जाने के इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने पांच बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को तत्काल निलंबित कर दिया। अधिकारियों द्वारा अब इस बात की गहन जांच की जा रही है कि ये दस्तावेज बाहर कैसे पहुंचे।
फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज और किशोर हिरासत में
इससे पूर्व राजधानी के फ्रीडम पार्क में नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया था। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन में अभिनेता प्रकाश राज के साथ अभिनेता किशोर भी शामिल हुए थे। मंच से प्रकाश राज ने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को उसके वोट के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। शांति भंग होने की आशंका के चलते पुलिस ने दोनों अभिनेताओं सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।
'कर्नाटक तब तक नहीं सोएगा', कानूनी लड़ाई का ऐलान
रिहाई के बाद जारी वीडियो में प्रकाश राज ने आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा और साथ ही राज्य सरकार से भी इस जनहित के मुद्दे पर समर्थन देने की अपील की जाएगी।


